Sweden के भविष्य के लड़ाकू विमान सिस्टम के लिए GKN Aerospace को 390 मिलियन क्रोना का कॉन्ट्रैक्ट
Sweden की Defence Materiel Administration (FMV) ने GKN Aerospace को भविष्य के लड़ाकू विमान सिस्टम से जुड़ी अहम तकनीकों को आगे बढ़ाने के लिए नया समझौता दिया है. इस समझौते की कुल कीमत करीब 390 मिलियन स्वीडिश क्रोना है. इसके तहत GKN Aerospace स्वीडन की अगली पीढ़ी की कॉम्बैट एयर क्षमता के लिए जरूरी तकनीकों के विकास और प्रदर्शन पर काम करेगी.
यह समझौता Sweden के Future Combat Air System Concept Programme (KFS) का हिस्सा है. कार्यक्रम का उद्देश्य भविष्य के लड़ाकू विमान सिस्टम से जुड़ी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करना और आने वाले वर्षों में स्वीडन की कॉम्बैट एयर क्षमता के लिए तकनीकी विकल्प तैयार करना है.
थर्मल मैनेजमेंट और इलेक्ट्रिकल पावर पर रहेगा जोर
नए समझौते के तहत GKN Aerospace कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों पर काम करेगी. इनमें थर्मल मैनेजमेंट, ऑनबोर्ड इलेक्ट्रिकल पावर, प्रोपल्शन और विमान की डिटेक्टेबिलिटी कम करने से जुड़ी तकनीकें शामिल हैं.
आधुनिक लड़ाकू विमानों में सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य हाई-पावर उपकरणों की संख्या बढ़ने के साथ विमान के अंदर पैदा होने वाली गर्मी को नियंत्रित करना और पर्याप्त इलेक्ट्रिकल पावर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसे में इन क्षेत्रों में नई तकनीकों का विकास भविष्य के कॉम्बैट एयर सिस्टम के लिए अहम माना जा रहा है.
2028 तक तकनीकों का विकास और प्रदर्शन
GKN Aerospace इस कार्यक्रम के तहत नई तकनीकों के demonstrators विकसित करने और उनके प्रदर्शन पर भी काम करेगी. समझौते के अनुसार यह गतिविधियां 2028 तक जारी रहेंगी. कंपनी का काम केवल किसी एक सिस्टम के विकास तक सीमित नहीं होगा, बल्कि भविष्य के combat-air architecture के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताओं और development methods को आगे बढ़ाने पर भी केंद्रित रहेगा.
FMV, स्वीडिश सशस्त्र बल और उद्योग मिलकर करेंगे काम
इस कार्यक्रम में GKN Aerospace के साथ स्वीडिश Defence Materiel Administration (FMV), Swedish Armed Forces, Swedish Defence Research Agency (FOI) और Saab भी शामिल हैं. इसका उद्देश्य सरकारी संस्थानों, रक्षा अनुसंधान संगठनों और उद्योग के बीच मिलकर भविष्य की लड़ाकू विमान क्षमताओं के लिए तकनीकी आधार तैयार करना है.
GKN Aerospace के लिए यह समझौता स्वीडन के भविष्य के combat-air systems में उसकी भूमिका को आगे बढ़ाने वाला कदम है. कंपनी पहले से ही एयरोस्पेस और एयरो-इंजन तकनीकों के क्षेत्र में काम करती है और इस कार्यक्रम के जरिए वह भविष्य की लड़ाकू विमान तकनीकों से जुड़े विकास कार्यों में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगी.
स्वीडन के लिए भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए देश 2040 के बाद की अपनी combat-air capability के लिए जरूरी तकनीकी विकल्पों और क्षमताओं का आकलन कर रहा है. नए समझौते के तहत विकसित की जाने वाली तकनीकें इसी दीर्घकालिक तैयारी का हिस्सा हैं.