Iran के बढ़ते खतरे के बीच US का बड़ा दांव, Saudi Arabia को 20,000 APKWS II स्मार्ट रॉकेट देने की मंजूरी

US Approves $1.96 Billion APKWS II Deal for Saudi Arabia Amid Iran Tensions | सऊदी अरब को 20,000 स्मार्ट रॉकेट देगा अमेरिका

मध्य पूर्व में लगातार बिगड़ते सुरक्षा माहौल के बीच US ने Saudi Arabia की सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. वॉशिंगटन ने लगभग 1.96 अरब डॉलर (करीब 16,800 करोड़ रुपये) के Advanced Precision Kill Weapon System (APKWS) II लेजर-गाइडेड रॉकेट्स की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है. हालांकि यह रक्षा सौदा अभी अमेरिकी कांग्रेस की अंतिम स्वीकृति के बाद ही लागू होगा.

20,000 स्मार्ट रॉकेट्स के साथ मिलेगा पूरा सैन्य पैकेज

प्रस्तावित रक्षा पैकेज के तहत सऊदी अरब को 20,000 APKWS II लेजर-गाइडेड रॉकेट्स दिए जाएंगे. इसके अलावा लॉजिस्टिक सपोर्ट, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स और अन्य आवश्यक सैन्य उपकरण भी पैकेज का हिस्सा होंगे.

APKWS II एक ऐसी प्रणाली है जो सामान्य 70 मिमी रॉकेट को अत्यधिक सटीक लेजर-गाइडेड हथियार में बदल देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम लागत में भी यह बेहद सटीक हमला करने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के ड्रोन, हल्के बख्तरबंद वाहन, रॉकेट लॉन्चर और अन्य सामरिक लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सकता है.

ड्रोन युद्ध के दौर में क्यों बढ़ी APKWS II की अहमियत?

US Approves $1.96 Billion APKWS II Deal for Saudi Arabia Amid Iran Tensions | सऊदी अरब को 20,000 स्मार्ट रॉकेट देगा अमेरिका

पिछले कुछ वर्षों में मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र का स्वरूप तेजी से बदला है. सस्ते लेकिन घातक ड्रोन अब पारंपरिक मिसाइलों जितनी बड़ी चुनौती बन चुके हैं. यमन के हूती विद्रोहियों, ईरान समर्थित संगठनों और हालिया क्षेत्रीय संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि छोटे ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

ऐसे में APKWS II को कम लागत वाला लेकिन बेहद प्रभावी काउंटर-ड्रोन हथियार माना जा रहा है. यही कारण है कि अमेरिका इस सिस्टम को अपने सहयोगी देशों की वायु रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है.

ऐसे समय आया फैसला जब पूरा क्षेत्र उबाल पर

अमेरिका की यह मंजूरी ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया कई मोर्चों पर तनाव झेल रहा है.

  • अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है.
  • होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है.
  • ईरान लगातार अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को चेतावनी दे रहा है.
  • खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक बढ़ा दी गई है.
  • सऊदी अरब अपनी वायु रक्षा और ड्रोन-रोधी क्षमताओं को तेजी से आधुनिक बना रहा है.

इन्हीं परिस्थितियों में यह सौदा केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

अमेरिका का क्या है उद्देश्य?

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार इस प्रस्तावित बिक्री का उद्देश्य मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखना, सहयोगी देशों की सुरक्षा क्षमता बढ़ाना और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को मजबूत करना है.

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस सौदे के बाद सऊदी अरब अपनी सीमाओं, सैन्य ठिकानों और तेल एवं ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की बेहतर सुरक्षा कर सकेगा. साथ ही भविष्य में ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों का अधिक प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सकेगा.

क्या बदल सकता है क्षेत्रीय शक्ति संतुलन?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा केवल हथियारों की आपूर्ति भर नहीं है, बल्कि अमेरिका का एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत भी है. वॉशिंगटन यह संदेश देना चाहता है कि ईरान से बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच वह अपने प्रमुख खाड़ी सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ा है.

यदि अमेरिकी कांग्रेस इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे देती है, तो सऊदी अरब की ड्रोन-रोधी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इसका असर न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और भविष्य की सैन्य रणनीतियों पर भी दिखाई दे सकता है.

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