THAAD Missile System को मिलेगी नई ताकत, US ने Lockheed Martin को दिया $35 अरब का बड़ा करार
अमेरिका ने अपनी मिसाइल डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सरकार ने रक्षा कंपनी Lockheed Martin को THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए करीब 35 अरब डॉलर (लगभग 2.9 लाख करोड़ रुपये) तक का सात साल का करार दिया है.
इस करार का सबसे बड़ा उद्देश्य THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन मौजूदा स्तर से करीब चार गुना तक बढ़ाना है, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त मिसाइल स्टॉक उपलब्ध रहे.
THAAD दुनिया की सबसे आधुनिक मिसाइल डिफेंस प्रणालियों में शामिल है. यह दुश्मन की कम दूरी, मध्यम दूरी और इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है. इसकी खासियत यह है कि यह पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह लक्ष्य को इंटरसेप्ट कर सकती है.
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश
Lockheed Martin ने THAAD उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार शुरू किया है. कंपनी ने 2030 तक 9 अरब डॉलर से अधिक निवेश की योजना बनाई है, जिसमें कई नई और आधुनिक उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं.
यह करार अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की नई अधिग्रहण रणनीति का हिस्सा है, जिसमें लंबी अवधि के अनुबंध देकर हथियारों के उत्पादन को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है.
क्यों अहम है THAAD?

THAAD सिस्टम को अमेरिका ने दुनिया के कई रणनीतिक क्षेत्रों में तैनात किया हुआ है. यह खास तौर पर उन खतरों के खिलाफ बनाया गया है जहां दुश्मन बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर सकता है. हाल के वर्षों में मिसाइल हमलों और बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग तेजी से बढ़ी है.
इस नए करार से अमेरिका अपनी मिसाइल डिफेंस सप्लाई चेन मजबूत करेगा और सहयोगी देशों के लिए भी THAAD क्षमता उपलब्ध कराने की स्थिति बेहतर होगी.
THAAD की ताकत
बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में नष्ट करने की क्षमता
हिट-टू-किल तकनीक (सीधे टक्कर मारकर लक्ष्य नष्ट करना)
वायुमंडल के अंदर और बाहर इंटरसेप्शन
अमेरिका और सहयोगी देशों की मिसाइल डिफेंस शील्ड का अहम हिस्सा
यह सौदा ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में मिसाइल क्षमताओं का विस्तार हो रहा है और बड़े देश अपनी एयर एवं मिसाइल डिफेंस प्रणालियों को तेजी से मजबूत कर रहे हैं.