Iran का बड़ा दावा! नए Arash-e Kamangir एयर डिफेंस सिस्टम ने गिराया अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन
Iran ने दावा किया है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन को अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम “Arash-e Kamangir” से मार गिराया है. ईरानी मीडिया के अनुसार यह पहली बार है जब इस स्वदेशी प्रणाली का वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में इस्तेमाल किया गया है.
हालांकि अभी तक इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दिखाती है कि लगातार अमेरिकी और इजरायली हमलों के बावजूद ईरान की वायु रक्षा क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
ईरान की Fars News Agency के मुताबिक यह ड्रोन क़ेश्म द्वीप (Qeshm Island) के पास गिराया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि “Arash-e Kamangir” सिस्टम में स्टील्थ डिटेक्शन जैसी क्षमता मौजूद है और इसे खास तौर पर दुश्मन के ड्रोन और निगरानी विमानों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है.
ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए “कड़ा संदेश” बताया है. खास बात यह है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसी इलाके से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य टकराव का वैश्विक असर पड़ सकता है.
क्या सच में नया सिस्टम इतना खतरनाक है?
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के दावों को पूरी तरह सच मानने से पहले सावधानी जरूरी है, क्योंकि तेहरान पहले भी कई सैन्य उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता रहा है. लेकिन विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में कम लागत वाले मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने पर काफी काम किया है.
विश्लेषकों का मानना है कि “Arash-e Kamangir” संभवतः ऐसा “Pop-up Surface-to-Air Missile System” हो सकता है, जिसे तेजी से कहीं भी तैनात किया जा सके. यह सिस्टम पारंपरिक बड़े रडार नेटवर्क पर निर्भर नहीं होता और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल या हीट-सीकिंग तकनीक से लक्ष्य को ट्रैक कर सकता है.
MQ-9 Reaper क्यों बना आसान निशाना?
अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन मुख्य रूप से निगरानी और लंबे समय तक हवा में रहने के लिए बनाया गया है. इसकी गति लड़ाकू विमानों की तुलना में काफी कम होती है. यही कारण है कि यदि कोई मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम सही समय पर सक्रिय हो जाए तो ऐसे ड्रोन को गिराना संभव हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब बड़े और महंगे एयर डिफेंस नेटवर्क की जगह छोटे, सस्ते और तेजी से स्थान बदलने वाले सिस्टम पर ज्यादा भरोसा कर रहा है. इससे अमेरिका और इजरायल को हमले के लिए अधिक महंगे स्टैंडऑफ हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है.
क्या Iran अभी भी जवाब देने में सक्षम है?
इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरान के कई बड़े एयर डिफेंस सिस्टम और रडार नेटवर्क को नुकसान पहुंचा है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अभी भी “Low-Level Persistent Threat” बनाए रखने में सक्षम है. यानी वह दुश्मन के विमानों और ड्रोन के लिए लगातार खतरा बना रह सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका या इजरायल ईरान की जवाबी क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते, तो हर नया हमला खाड़ी क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव और तेल आपूर्ति संकट का खतरा बढ़ा सकता है.
ईरान ने हाल के वर्षों में Shahed ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन में भी तेजी दिखाई है. यही कारण है कि कई विश्लेषकों का मानना है कि लंबी लड़ाई की स्थिति में ईरान अपनी कम लागत वाली सैन्य रणनीति के जरिए अमेरिका और इजरायल पर आर्थिक दबाव बना सकता है.