ISRO का कमाल! गगनयान का 5.7 टन क्रू मॉड्यूल आसमान से गिरकर भी सुरक्षित उतरा
भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन Indian Space Research Organisation (ISRO) ने आज सुबह गगनयान कार्यक्रम के तहत दूसरा Integrated Air-Drop Test (IADT) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह परीक्षण अगस्त 2025 में हुए पहले टेस्ट के बाद एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य गगनयान मिशन के Crew Module के सुरक्षित लैंडिंग सिस्टम—खासतौर पर पैराशूट और रिकवरी मैकेनिज्म—को परखना था, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापसी के दौरान बेहद अहम भूमिका निभाते हैं.
कैसे हुआ पूरा टेस्ट?

टेस्ट के दौरान करीब 5.7 टन वजनी क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के Boeing CH-47 Chinook हेलीकॉप्टर की मदद से लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया. इसके बाद इसे Bay of Bengal में, Sriharikota तट के पास हवा में गिराया गया.
जैसे ही मॉड्यूल को छोड़ा गया, उसने पूरी तरह ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए पहले ड्रोग पैराशूट और फिर मुख्य पैराशूट को तैनात किया. इस प्रक्रिया ने मॉड्यूल की गति को नियंत्रित करते हुए उसे धीरे-धीरे समुद्र में सुरक्षित “सॉफ्ट स्प्लैशडाउन” के साथ उतारा.
क्यों है यह टेस्ट महत्वपूर्ण?

- गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए यह सिस्टम बेहद जरूरी है
- पैराशूट और रिकवरी सिस्टम की विश्वसनीयता और सटीकता का सफल परीक्षण
- भविष्य के मानव मिशन के लिए सुरक्षा मानकों को मजबूत करना
गगनयान की ओर एक और मजबूत कदम
यह सफलता भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan की दिशा में एक और निर्णायक कदम है. ISRO लगातार इस मिशन के हर महत्वपूर्ण चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर रहा है, जिससे जल्द ही भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष की यात्रा करते नजर आ सकते हैं.
कुल मिलाकर, यह टेस्ट दिखाता है कि भारत अब मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए तेजी से तैयार हो रहा है और गगनयान मिशन अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच चुका है.