BRICS नौसैनिक अभ्यास से India क्यों रहा दूर? समझिए रणनीतिक संकेत और वैश्विक संदेश

BRICS ‘At Sea’ अभ्यास से भारत दूर, दक्षिण अफ्रीका के तट पर नौसैनिक ड्रिल में क्यों नहीं हुआ शामिल?

दक्षिण अफ्रीका के तट के पास हिंद महासागर में आयोजित बहुपक्षीय BRICS नौसैनिक अभ्यास इन दिनों चर्चा में है, लेकिन इस ड्रिल में भारत की गैरमौजूदगी ने रणनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. रूस, चीन, ईरान और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं की मौजूदगी के बीच भारत ने इस अभ्यास से दूरी बनाए रखी, जिसे एक सोचा-समझा और रणनीतिक फैसला माना जा रहा है.

क्या है ‘BRICS At Sea’ नौसैनिक अभ्यास?

यह अभ्यास BRICS और BRICS-Plus देशों के बीच समुद्री सहयोग, सामुद्रिक सुरक्षा और संयुक्त ऑपरेशंस को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया. अभ्यास में युद्धपोत, हेलिकॉप्टर, समुद्री निगरानी और समन्वित युद्धाभ्यास शामिल रहे. हालांकि, इस सैन्य ड्रिल का नाम BRICS से जुड़ा होने के बावजूद भारत ने इसमें भाग नहीं लिया.

BRICS ‘At Sea’ अभ्यास से भारत दूर, दक्षिण अफ्रीका के तट पर नौसैनिक ड्रिल में क्यों नहीं हुआ शामिल?

BRICS Naval Exercise से भारत क्यों रहा दूर?

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत की अनुपस्थिति के पीछे कई अहम कारण हैं:

  • BRICS का मूल स्वरूप आर्थिक मंच का है, न कि सैन्य गठबंधन का. भारत इसे सैन्य रंग देने से बचता रहा है.
  • भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति पर कायम है और ऐसे सैन्य अभ्यासों से दूरी बनाता है, जिन्हें किसी गुट या धुरी के रूप में देखा जा सकता है.
  • अभ्यास में चीन और ईरान की सक्रिय भूमिका को भी एक संवेदनशील कारक माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीति पहले से तनावपूर्ण है.
  • भारत पहले से ही Quad, Malabar और अन्य द्विपक्षीय व बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है.

भारत का रुख: संतुलन और सावधानी

BRICS ‘At Sea’ अभ्यास से भारत दूर, दक्षिण अफ्रीका के तट पर नौसैनिक ड्रिल में क्यों नहीं हुआ शामिल?

भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि वह किसी भी सैन्य ब्लॉक का हिस्सा बनने के बजाय इश्यू-बेस्ड और पार्टनरशिप-ड्रिवन सहयोग को प्राथमिकता देता है. BRICS मंच पर भारत की भागीदारी आर्थिक, वित्तीय और विकासात्मक मुद्दों तक सीमित रही है.

वैश्विक संकेत क्या हैं?

विश्लेषकों का मानना है कि भारत की गैरमौजूदगी यह संदेश देती है कि नई दिल्ली BRICS को NATO-जैसे सैन्य मंच में बदलने के प्रयासों से सहमत नहीं है. भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र और संतुलित समुद्री शक्ति के रूप में अपनी भूमिका बनाए रखना चाहता है.

दक्षिण अफ्रीका के तट पर हुए BRICS नौसैनिक अभ्यास से भारत की दूरी कोई संयोग नहीं, बल्कि एक साफ रणनीतिक संकेत है. यह दिखाता है कि भारत वैश्विक मंचों पर सहयोग तो चाहता है, लेकिन किसी भी ऐसे सैन्य गठजोड़ से बचना चाहता है जो उसकी स्वतंत्र विदेश और रक्षा नीति को सीमित करे.

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