Russia ने Belarus में तैनात की hypersonic missile ‘Oreshnik’, Europe में बढ़ा Nuclear Tension

Russia Deploys Hypersonic Oreshnik Missile in Belarus, Europe Faces New Nuclear Tension

Russia ने अपनी नई और अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली ‘Oreshnik’ को आधिकारिक रूप से बेलारूस में तैनात कर दिया है. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको और रूसी रक्षा मंत्रालय दोनों ने इसकी पुष्टि की है. इस मिसाइल को अब combat duty (लड़ाकू स्थिति) में रखा गया है, जिससे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और NATO देशों में चिंता बढ़ गई है.

क्या है Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल?

Oreshnik रूस की नई पीढ़ी की न्यूक्लियर-सक्षम हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जा रही है.

  • यह मिसाइल Mach-5 से अधिक गति से उड़ान भरने में सक्षम है.
  • पारंपरिक और परमाणु (nuclear) वारहेड दोनों ले जा सकती है.
  • इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन है, क्योंकि यह उड़ान के दौरान तेज़ी से दिशा बदल सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, Oreshnik की तैनाती रूस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पश्चिमी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चुनौती देना चाहता है.

Russia Deploys Hypersonic Oreshnik Missile in Belarus, Europe Faces New Nuclear Tension

बेलारूस में तैनाती क्यों अहम है?

बेलारूस की भौगोलिक स्थिति रूस को पूर्वी और मध्य यूरोप तक सीधी सैन्य पहुंच देती है.

  • Oreshnik की तैनाती से पोलैंड, जर्मनी और बाल्टिक देशों पर दबाव बढ़ेगा
  • NATO की पूर्वी सीमा पर रणनीतिक संतुलन बदल सकता है
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के दायरे के और फैलने की आशंका बढ़ी है

NATO और पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया

हालांकि NATO ने अभी तक आधिकारिक जवाबी कदम की घोषणा नहीं की है, लेकिन पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह तैनाती Cold War जैसी स्थिति को फिर से जन्म दे सकती है. यूरोप में मिसाइल डिफेंस और सैन्य तैनाती को और तेज़ करेगी. अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए यह कदम एक रणनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.

रूस का संदेश क्या है?

रूस साफ संकेत दे रहा है कि वह अपनी सीमाओं के पास NATO की सैन्य गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा. हाइपरसोनिक हथियारों में अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है. किसी भी बड़े टकराव की स्थिति में तेज़ और निर्णायक जवाब देने में सक्षम है

बेलारूस में Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल की तैनाती सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि वैश्विक जियो-पॉलिटिक्स में बड़ा बदलाव है. आने वाले दिनों में यह फैसला यूरोप की सुरक्षा नीति और रूस-पश्चिम संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है.

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