राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू INS Vaghsheer पर पहुंची, पनडुब्बी बल की ताकत को नजदीक से देखा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिमी समुद्री तट (Western Seaboard) पर भारतीय नौसेना की पनडुब्बी INS Vaghsheer पर पहुंची. यह दौरा न केवल ऐतिहासिक रहा, बल्कि भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शक्ति और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को भी मजबूती देने वाला साबित हुआ.
INS वाघशीर पर सवार रहते हुए राष्ट्रपति को भारतीय नौसेना के सबमरीन आर्म की भूमिका, भारत की समुद्री रणनीति (Maritime Strategy) में इसके महत्व और राष्ट्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा में इसके योगदान पर विस्तृत जानकारी दी गई.
अधिकारियों ने बताया कि किस तरह पनडुब्बियां समुद्र के भीतर रहकर डिटरेंस, सी-सर्विलांस और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं.
INS Vaghsheer: स्वदेशी शक्ति का प्रतीक

राष्ट्रपति मुर्मू ने INS वाघशीर को भारतीय नौसेना की पेशेवर उत्कृष्टता, युद्ध तत्परता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का चमकता उदाहरण बताया.
उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी पनडुब्बी भारत की रक्षा निर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.

क्रू से संवाद, समर्पण की सराहना
इस दौरान राष्ट्रपति ने INS वाघशीर के अधिकारियों और नाविकों से संवाद किया और उनके समर्पण, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा भावना की खुलकर प्रशंसा की.
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में समुद्र के भीतर काम करने वाले ये योद्धा देश की सुरक्षा की अदृश्य लेकिन सबसे मज़बूत ढाल हैं.

समुद्री सुरक्षा के लिए मजबूत संदेश
राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही हैं. INS वाघशीर जैसी आधुनिक पनडुब्बियाँ भारत की सी-डिनायल क्षमता को मज़बूत करती हैं और संभावित विरोधियों के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश देती हैं.

आत्मनिर्भर भारत और नौसेना की भविष्य की दिशा
INS वाघशीर पर राष्ट्रपति की सॉर्टी यह दर्शाती है कि भारत न केवल आधुनिक हथियार प्रणालियाँ विकसित कर रहा है, बल्कि उन्हें ऑपरेशनल लेवल पर आत्मविश्वास के साथ तैनात भी कर रहा है.
यह कदम आने वाले समय में भारतीय नौसेना की पनडुब्बी ताकत को और विस्तार देने की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है.