DRDO ने तीनों सेनाओं को सौंपी सात स्वदेशी रक्षा तकनीकें, 12 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

DRDO Transfers Seven Indigenous Defence Technologies to Armed Forces; Approves 12 New Projects

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को आगे बढ़ाते हुए प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना के तहत विकसित सात महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को सौंप दी हैं.

यह तकनीकें पूरी तरह भारत में विकसित की गई हैं और व्यापक परीक्षणों के बाद औपचारिक रूप से सेनाओं को सौंपी गईं.

सात उन्नत तकनीकें सेनाओं को हस्तांतरित

सौंपे गए प्रमुख स्वदेशी सिस्टम इस प्रकार हैं—

  • एयरबोर्न सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर्स के लिए उच्च वोल्टेज विद्युत आपूर्ति प्रणाली
  • नौसेना जेटी के लिए ज्वार-कुशल गैंगवे
  • अत्याधुनिक ULF–HF स्विचिंग मैट्रिक्स प्रणाली
  • पानी के भीतर प्लेटफॉर्म के लिए VLF लूप एरियल
  • तीव्र अवरोधक नौकाओं के लिए स्वदेशी वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली
  • उपयोग हुई लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम निकालने की नई प्रक्रिया
  • पानी के भीतर सेंसर एवं निगरानी कार्यों के लिए दीर्घ-जीवन समुद्री जल बैटरी प्रणाली

इन तकनीकों के विकास में तीनों सेनाओं एवं डीआरडीओ विशेषज्ञों के बीच घनिष्ठ समन्वय शामिल रहा.

नई दिल्ली में आयोजित समिति बैठक में आधिकारिक हस्तांतरण

इन तकनीकों का औपचारिक हस्तांतरण 2 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित DRDO मुख्यालय में आयोजित अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में किया गया. बैठक की अध्यक्षता रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने की.

बैठक में सशस्त्र बलों, रक्षा उत्पादन विभाग और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.

12 नई रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी

बैठक के दौरान विभिन्न उभरती रक्षा आवश्यकताओं पर विचार करते हुए सामरिक, नौसैनिक, वायु एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों से जुड़ी 12 नई रक्षा परियोजनाओं को भी मंजूरी प्रदान की गई.

इन परियोजनाओं का उद्देश्य—

  • उन्नत स्वदेशी क्षमताओं का विकास
  • विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना
  • उभरती तकनीकों में आत्मनिर्भरता को गति देना है.

परियोजनाओं के तेज क्रियान्वयन पर जोर

समिति ने सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और उनके अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर बल दिया. विकसित सिस्टमों के शीघ्र समावेशन के लिए नीति समर्थन एवं संस्थागत तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश भी की गई.

आत्मनिर्भर रक्षा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

DRDO प्रमुख ने कहा कि TDF योजना के प्रभावी कार्यान्वयन से स्वदेशी रक्षा तकनीकों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, और यह उपलब्धियां भारत को उभरते रक्षा क्षेत्रों में उच्च क्षमता प्रदान करेंगी.

इस हस्तांतरण और परियोजना स्वीकृतियों के साथ भारत ने घरेलू रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है.

2 thoughts on “DRDO ने तीनों सेनाओं को सौंपी सात स्वदेशी रक्षा तकनीकें, 12 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

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