ISRAEL ने किया ऐलान – “तुर्की की सेना को गाजा में प्रवेश नहीं मिलेगा”
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ISRAEL के विदेश मंत्री गिडिऑन सायर (Gideon Saar) ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि उनका देश गाजा में किसी भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल में तुर्की की सेना की भागीदारी स्वीकार नहीं करेगा.
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के नेतृत्व में गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilization Force) तैनात करने की योजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य युद्ध के बाद वहां शांति और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को तेज़ करना है.
क्यों बढ़ा विवाद
तुर्की ने इस मिशन में हिस्सा लेने की इच्छा जताई थी. तुर्की सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि वह गाजा में मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और सुरक्षा निगरानी में भूमिका निभाने को तैयार है.
हालांकि, ISRAEL ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्री सायर ने कहा,
“हम सिर्फ उन्हीं देशों को इस फोर्स का हिस्सा बनने देंगे जिन पर हमें भरोसा है और जो हमारी सुरक्षा दृष्टि से निष्पक्ष हैं. तुर्की ने हाल के युद्ध में हमारे खिलाफ शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाया था.”
ISRAEL की आपत्ति के कारण

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन (Recep Tayyip Erdoğan) लगातार गाजा युद्ध के दौरान इज़राइल की आलोचना करते रहे हैं. हालांकि तुर्की ने सार्वजनिक रूप से हमास का समर्थन किया था और इज़राइल पर “युद्ध अपराध” का आरोप लगाया था. इस कारण इज़राइल को तुर्की की सैन्य मौजूदगी “असुरक्षित” और “राजनीतिक रूप से पक्षपाती” लगती है.
गाजा स्थिरीकरण फोर्स क्या है
अमेरिका और यूरोपीय देशों के नेतृत्व में एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय फोर्स तैयार की जा रही है जो गाजा में युद्धविराम की निगरानी करेगी, मानवीय राहत पहुंचाएगी और गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करेगी.
इस फोर्स में संभावित रूप से फ्रांस, इटली, जॉर्डन, मिस्र और जापान जैसे देशों के शामिल होने की चर्चा चल रही है. अब तुर्की की एंट्री पर रोक के बाद, इस पहल पर नए सिरे से समीक्षा की जाएगी.
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद केवल गाजा की स्थिरता से नहीं, बल्कि तुर्की-इजराइल संबंधों की पुरानी खटास से जुड़ा है.
तुर्की खुद को “मुस्लिम विश्व का नेतृत्वकर्ता” मानता है, जबकि इज़राइल अमेरिका के साथ अपने सामरिक गठबंधन को लेकर प्रतिबद्ध है.
इस विवाद से क्षेत्रीय शक्ति समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है — खासकर तब जब रूस और ईरान भी मध्य पूर्व में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
अमेरिका अब यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि किन देशों को इस बल में शामिल किया जाए ताकि “सभी पक्षों की सहमति” बने. तुर्की की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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