Pakistan ने दी अफगानिस्तान को खुले युद्ध की धमकी, इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता पर टिकी सबकी निगाहें
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुँच गया है. दोनों देशों के बीच Durand Line पर बढ़ती झड़पों और सीमा संघर्षों के बीच अब पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि अगर इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता (Istanbul Peace Talks) असफल रही, तो हालात “खुले युद्ध (Open War)” की ओर बढ़ सकते हैं.
अफगानिस्तान सीमा पर हालात ‘सीज़फायर’ के बाद भी तनाव बरकरार
पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी, रॉकेट हमलों और सीमा पार घुसपैठ की घटनाओं ने हालात बिगाड़ दिए थे. दोनों देशों के बीच हुए सीज़फायर समझौते के बाद अस्थायी शांति बनी हुई है, लेकिन इस शांति को “बहुत नाजुक” बताया जा रहा है.
पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन, खासकर Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP), उसकी सीमाओं के भीतर हमले कर रहे हैं. वहीं, अफगान तालिबान इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि “सीमा पार हर गोलीबारी की शुरुआत पाकिस्तान करता है.”
इस्तांबुल में चल रही वार्ता – आखिरी मौका?
तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में इस समय दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच Ceasefire Talks का एक अहम दौर चल रहा है. वार्ता में तुर्की, कतर और चीन भी मध्यस्थ के रूप में शामिल हैं.
पाकिस्तान ने स्पष्ट कहा है कि अगर वार्ता से “कोई ठोस और स्थायी समाधान” नहीं निकलता, तो वह “पूर्ण युद्ध” का रास्ता अपनाने पर मजबूर होगा.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा मोहम्मद आसिफ़ ने कहा,
“हम शांति चाहते हैं, लेकिन अगर हमारी सीमाओं की सुरक्षा को चुनौती दी गई तो हम खुला युद्ध छेड़ने से पीछे नहीं हटेंगे.”
Durand Line: तनाव की जड़
Durand Line ब्रिटिश काल में खींची गई 2,640 किमी लंबी सीमा है, जिसे पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान आज तक इसे मान्यता नहीं देता. यही सीमा अब ड्रग तस्करी, घुसपैठ और चरमपंथी गतिविधियों का केंद्र बन चुकी है.
सीमा के दोनों ओर रहने वाले पश्तून समुदाय को भी यह विभाजन स्वीकार नहीं है, जिससे स्थानीय असंतोष और गहरा जाता है.
संभावित परिणाम – अगर वार्ता असफल हुई
यदि इस्तांबुल वार्ता असफल रहती है, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं.
- सीमा पर पूर्ण सैन्य टकराव: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सैनिक आमने-सामने आ सकते हैं.
- मिलिटेंट्स की गतिविधियों में उछाल: TTP जैसे संगठन इसका फायदा उठाकर दोनों देशों के बीच और तनाव बढ़ा सकते हैं.
- मानवीय संकट: सीमा इलाकों में हजारों लोग विस्थापित हो सकते हैं, जिससे नए शरणार्थी संकट की आशंका है.
- क्षेत्रीय अस्थिरता: भारत, ईरान और मध्य एशियाई देशों पर भी इस तनाव का असर पड़ सकता है.
एक बार फिर दक्षिण एशिया युद्ध की दहलीज़ पर?
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की यह धमकी “राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति” भी हो सकती है.
देश की घरेलू राजनीति में सेना पर बढ़ते असंतोष और आतंकी हमलों में बढ़ोतरी के कारण सरकार कड़े बयान देकर दबाव को हटाना चाहती है.
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पहले से आर्थिक संकट, सूखे और अंतरराष्ट्रीय अलगाव से जूझ रही है – ऐसे में किसी बड़े संघर्ष की स्थिति उसके लिए भी बेहद विनाशकारी साबित हो सकती है.
इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता फिलहाल पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच “युद्ध और शांति” की एक पतली रेखा पर टिकी है. यदि समझौता हो गया तो यह दक्षिण एशिया में एक बड़ी राहत साबित होगी.
लेकिन अगर वार्ता टूट गई — तो यह संघर्ष केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन को हिला सकता है.
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