भारतीय नौसेना को मिला ‘MAHE’ – पहला Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft
भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी (Anti-Submarine Warfare) क्षमताओं को नई ऊँचाई पर ले जाते हुए, आज कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने पहला Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW SWC) ‘MAHE’ भारतीय नौसेना को औपचारिक रूप से सौंप दिया.
यह जहाज भारतीय नौसेना के “Aatmanirbhar Bharat” मिशन के तहत विकसित किया गया है और देश की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है.
डिलीवरी सेरेमनी का आयोजन

‘MAHE’ की डिलीवरी के दौरान Dr. हरिकृष्णन, निदेशक (ऑपरेशंस), CSL और कमांडर अमित चंद्र चौबे, CO (Designate), के बीच प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए.
इस मौके पर मुख्य स्टाफ अधिकारी (टेक), मुख्यालय पश्चिमी नौसेना कमान (HQWNC), WPS (कोच्चि) सहित भारतीय नौसेना और CSL के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.
‘MAHE’ की विशेषताएँ और भूमिका
‘MAHE’ को विशेष रूप से अंडरवाटर सर्विलांस, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, और पनडुब्बी-रोधी अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है.
यह जहाज शैलो वाटर (उथले समुद्री इलाकों) में ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है, जहाँ बड़े युद्धपोत प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाते.
‘MAHE’ उन्नत सेंसर, सोनार सिस्टम और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस है, जिससे यह पनडुब्बियों की मौजूदगी का शीघ्र पता लगाकर उन्हें निष्प्रभावी करने में सक्षम होगा.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम

इस परियोजना की सफलता न केवल भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी मजबूती प्रदान करती है.
यह पहल “Make in India – Make for the World” की भावना को साकार करती है और भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ती है.
‘MAHE’ की डिलीवरी के साथ ही भारत ने यह साबित कर दिया है कि देश अब अपने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक तकनीक और निर्माण क्षमता खुद रखता है.
यह कदम भारतीय नौसेना को और अधिक स्मार्ट, स्वावलंबी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा.