Pakistan – Afghanistan युद्ध क्यों भड़का? सीमा तनाव से ‘ओपन वॉर’ तक की पूरी कहानी

पाकिस्तान–अफगानिस्तान युद्ध क्यों भड़का? सीमा तनाव से ‘ओपन वॉर’ तक की पूरी कहानी

Pakistan और Afghanistan के बीच लंबे समय से सुलग रहा सीमा विवाद अब खुले सैन्य संघर्ष में बदल चुका है. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीधे हमलों के आरोप लगाए हैं और हालात इतने बिगड़ गए कि पाकिस्तान ने इसे आधिकारिक रूप से “ओपन वॉर” करार दिया है.

यह युद्ध अचानक नहीं भड़का, बल्कि इसके पीछे सालों की राजनीति, आतंकवाद, सीमा विवाद और अविश्वास की एक लंबी श्रृंखला है.

युद्ध की जड़ क्या है? — असली वजह

पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान में सत्ता संभाल रही तालिबान सरकार, पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पा रही है। खास तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि ये संगठन अफगान धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले कर रहा है.

वहीं अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि अफगानिस्तान किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद की इजाज़त नहीं देता. पाकिस्तान अपने आंतरिक सुरक्षा संकट के लिए अफगानिस्तान को बलि का बकरा बना रहा है.

ताजा हालात: कैसे शुरू हुआ खुला संघर्ष?

हालिया घटनाक्रम में हालात बेहद तेजी से बिगड़े है. सीमा पर भारी गोलीबारी और सैन्य झड़पें हो रही है. पाकिस्तान द्वारा अफगान क्षेत्र में हवाई और जमीनी हमले किए गए. जिसके जवाब में अफगान तालिबान की ओर से कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया दी गई है. यह संघर्ष अब सिर्फ सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक स्तर पर भी गंभीर मोड़ ले चुका है.

दोनों देशों के नुकसान और हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं है. लेकिन दोनों तरफ से कई लोगों की मौत की खबरे आ रही है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना के 55 से ज्यादा सैनिकों की मौत हो चुकी है. जबकि कई तालिबान लड़ाके भी मारे गए है.

डूरंड लाइन: एक पुराना विवाद, नई आग

इस संघर्ष की एक ऐतिहासिक जड़ डूरंड लाइन है — यह वह विवादित सीमा है जिसे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जिसे अफगानिस्तान ऐतिहासिक रूप से स्वीकार नहीं करता. यही सीमा बार-बार झड़पों, घुसपैठ और सैन्य टकराव का केंद्र बनती रही है.

पाकिस्तान–अफगानिस्तान संघर्ष अब एक स्थानीय सीमा विवाद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संकट बनता जा रहा है. अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह जंग लंबी खिंच सकती है. आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह टकराव संवाद की मेज़ तक जाएगा या और भीषण युद्ध की ओर.

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