ड्रोन युद्ध की तैयारी में Germany, 536 मिलियन यूरो की स्ट्राइक ड्रोन डील से बदलेगी सैन्य रणनीति
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए Germany अब ड्रोन आधारित हमलावर क्षमताओं पर तेज़ी से निवेश कर रहा है. इसी दिशा में जर्मन सरकार ने 536 मिलियन यूरो के स्ट्राइक ड्रोन खरीदने की योजना को आगे बढ़ाया है, जिसे सेना की भविष्य की युद्ध रणनीति में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है.
इन स्ट्राइक ड्रोन की खासियत यह है कि ये सिर्फ हमला करने वाले हथियार नहीं हैं, बल्कि निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक प्रहार तीनों भूमिकाएं निभाने में सक्षम हैं. युद्धक्षेत्र में ये ड्रोन लक्ष्य के ऊपर मंडराते रहते हैं और कमांड मिलने पर तुरंत हमला कर सकते हैं, जिससे प्रतिक्रिया समय बेहद कम हो जाता है.
घरेलू कंपनियों पर भरोसा
यह फैसला जर्मनी के उस व्यापक सैन्य बदलाव का हिस्सा है, जिसमें Bundeswehr को पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़ाकर डिजिटल और नेटवर्क-आधारित युद्ध क्षमता से लैस किया जा रहा है. सरकार का फोकस अब भारी प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ तेज़, स्मार्ट और लागत-प्रभावी हथियार प्रणालियों पर है.
इस ड्रोन प्रोग्राम में जर्मनी की घरेलू रक्षा कंपनियां Helsing और Stark Defence अहम भूमिका निभाएंगी. इन ड्रोन को मुख्य रूप से लिथुआनिया में तैनात 45वीं जर्मन टैंक ब्रिगेड के लिए तैयार किया जा रहा है, जो NATO की पूर्वी सीमा पर अग्रिम मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल रही है.
इस सौदे की अवधि कई वर्षों तक फैली होगी और ड्रोन की तैनाती चरणबद्ध तरीके से की जाएगी. हालांकि, अंतिम मंजूरी अभी संसद की बजट समिति से मिलनी बाकी है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा.
NATO के पूर्वी मोर्चे पर तैनाती की तैयारी
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ जर्मनी की सैन्य क्षमता नहीं बढ़ाएगा, बल्कि यह संकेत भी देता है कि यूरोप अब भविष्य के युद्धों को ड्रोन-केंद्रित संघर्ष के रूप में देख रहा है. घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता देकर जर्मनी अपने रक्षा उद्योग को भी रणनीतिक रूप से मजबूत कर रहा है.
कुल मिलाकर, यह फैसला दर्शाता है कि जर्मनी आने वाले वर्षों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट हथियारों को अपनी सुरक्षा नीति की रीढ़ बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है.
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