China की रिसर्च में खुलासा, 80mm तोप से लॉन्च हो सकेगी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल
China एक ऐसी अत्याधुनिक हथियार तकनीक पर काम कर रहा है, जो भविष्य की हवाई जंग की तस्वीर बदल सकती है. चीनी वैज्ञानिकों ने मिनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जिसे पारंपरिक 80mm नौसैनिक या एंटी-एयरक्राफ्ट तोप से भी दागा जा सकता है.
यह जानकारी चीन से जुड़े रक्षा और विज्ञान शोध से सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि यह नई मिसाइल पारंपरिक तोप के गोले और महंगी एयर डिफेंस मिसाइलों के बीच की खाई को भर सकती है.
Mach 6 की रफ्तार, सेकंडों में हमला
रिपोर्ट के अनुसार, यह मिनी हाइपरसोनिक मिसाइल फायर होते ही Mach 6 (ध्वनि की गति से छह गुना तेज) तक पहुंच सकती है. इतनी अधिक रफ्तार के कारण दुश्मन के लड़ाकू विमान या ड्रोन इसे बहुत देर से पहचान पाएंगे. अनुमान है कि लक्ष्य को यह मिसाइल सिर्फ 2–3 किलोमीटर की दूरी पर ही दिखेगी, जिससे बचाव के लिए बेहद कम समय मिलेगा.
20 किमी से ज्यादा मारक क्षमता
चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मिसाइल 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तक प्रभावी हो सकती है और 10,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ रहे लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है. इसका मतलब है कि फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन इसके दायरे में होंगे.
हवा में तेज़ मोड़ लेने की क्षमता
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल हवा में 90 डिग्री तक का तेज़ मोड़ लेने में सक्षम बताई जा रही है. कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर इसकी हिट प्रॉबेबिलिटी 99% तक आंकी गई है, जो इसे पारंपरिक तोप के गोले से कहीं ज्यादा घातक बनाती है.
सस्ती लेकिन खतरनाक तकनीक
चीन इस तकनीक को इसलिए भी अहम मान रहा है क्योंकि
- इसे पारंपरिक तोपों से लॉन्च किया जा सकता है
- महंगी एयर डिफेंस मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ती हो सकती है
- तेज़ फायर रेट के साथ एक सेकंड में कई राउंड दागे जा सकते हैं
इससे युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में हाइपरसोनिक हथियार इस्तेमाल करने की संभावना बनती है.
वैश्विक सैन्य संतुलन पर असर
अगर यह तकनीक वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में सफल साबित होती है, तो यह मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. हाइपरसोनिक गति, कम रडार सिग्नेचर और तेज़ प्रतिक्रिया इसे भविष्य के युद्ध का खतरनाक हथियार बना सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह प्रयोग सिर्फ एक नया हथियार नहीं, बल्कि तोप और मिसाइल टेक्नोलॉजी के बीच की सीमाओं को मिटाने की कोशिश है— जो आने वाले वर्षों में वैश्विक सैन्य रणनीति को प्रभावित कर सकती है.