भारत की EEZ में ऑयल स्पिल पर सख़्त पहरा, Indian Coast Guard-NSIL-INCOIS का ऐतिहासिक MoU
भारतीय समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए Indian Coast Guard (ICG) ने आज NewSpace India Limited (NSIL) और Indian National Centre for Ocean Information Services (INCOIS) के साथ एक अहम त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर किए.
यह समझौता CGHQ, नई दिल्ली में साइन किया गया, जिसका उद्देश्य सैटेलाइट आधारित ऑयल स्पिल सर्विलांस सिस्टम का विकास करना है.
क्या है इस पहल की खासियत?
इस सैटेलाइट आधारित ऑयल स्पिल सर्विलांस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी रीयल-टाइम निगरानी क्षमता है. यह प्रणाली भारत की पूरी विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में समुद्री तेल रिसाव पर लगातार नज़र रख सकेगी, जिससे किसी भी प्रदूषण की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव होगी.
इस पहल में पूरी तरह स्वदेशी अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को और मजबूती देता है. सैटेलाइट डेटा के ज़रिए समुद्र में होने वाले तेल रिसाव की तेज़ पहचान और सटीक ट्रैकिंग की जा सकेगी, जिससे प्रदूषण के फैलाव को रोका जा सके.

सबसे अहम बात यह है कि यह सिस्टम तत्काल, समन्वित और प्रभावी प्रतिक्रिया को संभव बनाएगा. इससे भारतीय तटरक्षक बल, वैज्ञानिक एजेंसियां और अन्य संबंधित संस्थान मिलकर समय रहते कार्रवाई कर पाएंगे, जिससे समुद्री पर्यावरण को होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सकेगा.
क्यों है यह MoU रणनीतिक रूप से अहम?
- समुद्री प्रदूषण रोकथाम (Marine Pollution Prevention)
- समुद्री पर्यावरण और जैव विविधता की सुरक्षा
- शिपिंग दुर्घटनाओं और अवैध डिस्चार्ज पर कड़ी निगरानी
- भारत की ब्लू इकोनॉमी और तटीय सुरक्षा को मजबूती
यह पहल दिखाती है कि भारत अब स्पेस टेक्नोलॉजी + मैरीटाइम सिक्योरिटी, डिफेंस + एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन को एक साथ जोड़कर काम कर रहा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिस्टम भविष्य में तेल टैंकर दुर्घटनाओं, पोर्ट सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुपालन में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा.