भारत की आर्टिलरी में क्रांति: 155mm Ramjet-Assisted Artillery Shell से 80+ किमी तक मारक क्षमता

भारत की आर्टिलरी में क्रांति: 155mm रैमजेट-सहायित गोले से 80 किमी तक मारक क्षमता

भारत ने तोपखाने (Artillery) की दुनिया में ऐसा कदम उठा दिया है, जिसे गेम-चेंजर कहा जा रहा है. भारतीय सेना और भारतीय वैज्ञानिकों ने मिलकर 155mm Ramjet-Assisted Artillery Shell विकसित किया है, जो पारंपरिक आर्टिलरी गोलों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत ज्यादा दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगा.

यह तकनीक भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी, जो मिसाइल-स्तरीय तकनीक को आर्टिलरी शेल में उतारने में सफल हुए हैं.

क्या है Ramjet-Assisted Artillery Shell ?

साधारण शब्दों में कहें तो यह कोई आम गोला नहीं है. पारंपरिक आर्टिलरी शेल तोप से निकलने के बाद सिर्फ बैलिस्टिक पथ (गुरुत्वाकर्षण के सहारे) पर उड़ता है.. लेकिन रैमजेट-सहायित शेल में एक छोटा सा एयर-ब्रिदिंग इंजन (Ramjet) लगा होता है

यह इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है और उड़ान के दौरान अतिरिक्त थ्रस्ट पैदा करता है नतीजा, गोला ज्यादा तेज़, ज्यादा दूर और ज्यादा सटीक तरीके से लक्ष्य तक पहुँचता है.

कैसे काम करता है Ramjet?

भारत की आर्टिलरी में क्रांति: 155mm रैमजेट-सहायित गोले से 80 किमी तक मारक क्षमता

155mm गोले को जब तोप से दागा जाता है, तो वह पहले ही Mach 2+ स्पीड हासिल कर लेता है. इसी हाई-स्पीड पर रैमजेट इंजन एक्टिव हो जाता है. हवा अपने-आप इंजन में संपीड़ित होती है. ईंधन जलने से गोला लगातार आगे धकेला जाता है. यही वजह है कि यह गोला सामान्य शेल की तुलना में दोगुनी दूरी तक मार कर सकता है.

कितनी बढ़ेगी मारक क्षमता?

आर्टिलरी गोला   अनुमानित रेंज

पारंपरिक 155mm शेल  30–40 किमी

Extended Range Shell        45–50 किमी

Ramjet-Assisted Shell        60–80 किमी (भविष्य में 100+ किमी)

यानी अब दुश्मन की बैटरी भारत की तोपों की पहुँच में होगी, जबकि भारतीय तोपें काफी पीछे सुरक्षित दूरी पर रहेंगी.

परीक्षण और मौजूदा स्थिति

इस गोले का सफल प्रारंभिक परीक्षण पोखरण फायरिंग रेंज (राजस्थान) में किया जा चुका है. जबकि इसके विकास में IIT मद्रास और भारतीय सेना की सक्रिय भूमिका है. फिलहाल सिस्टम को ऑप्टिमाइज़ेशन और एडवांस ट्रायल फेज में लाया जा रहा है. एक बार फाइनल होने के बाद यह भारत की सभी 155mm तोपों के साथ संगत होगा.

क्या भारत दुनिया में पहला देश है?

बहुत हद तक हाँ!! रैमजेट तकनीक पहले मिसाइलों में इस्तेमाल होती रही है, लेकिन आर्टिलरी शेल के रूप में इसे ऑपरेशनल लेवल पर लाना बेहद कठिन माना जाता था. अमेरिका, यूरोप और चीन ने रिसर्च की, लेकिन भारत इस रेस में सबसे आगे निकलता दिख रहा है.

भारत के लिए रणनीतिक फायदे

1- दुश्मन की काउंटर-बैटरी पर बढ़त

अब भारत दुश्मन की तोपों को उनकी रेंज से बाहर रहते हुए तबाह कर सकेगा.

2- चीन और पाकिस्तान के खिलाफ बढ़त

LAC और LoC जैसे इलाकों में डीप-स्ट्राइक आर्टिलरी निर्णायक भूमिका निभा सकती है.

3- आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है — आयात पर निर्भरता कम होगी.

4-भविष्य में निर्यात की संभावना

यह तकनीक भारत को आर्टिलरी टेक्नोलॉजी एक्सपोर्टर बना सकती है.

क्यों है यह खबर बेहद अहम?

  • भारत अब सिर्फ रक्षा आयातक नहीं, हाई-एंड आर्टिलरी इनोवेटर बन रहा है
  • मिसाइल और आर्टिलरी के बीच की दूरी खत्म हो रही है
  • भविष्य की जंगों में लंबी दूरी + सटीकता निर्णायक होगी — और भारत उसी दिशा में आगे बढ़ चुका है

155mm रैमजेट-सहायित आर्टिलरी शेल सिर्फ एक नया गोला नहीं है, यह भारतीय सैन्य सोच में बदलाव का प्रतीक है. जहां पहले तोपें सीमित दूरी तक मार करती थीं, अब वही तोपें मिसाइल जैसी ताकत दिखाने जा रही हैं. आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारत की युद्ध-रणनीति को पूरी तरह बदल सकती है.

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