Indian Coast Guard के लिए 18 नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट पेट्रोल वेसल्स बनाएगा Hindustan Shipyard Limited
भारत की स्वदेशी रक्षा जहाज़ निर्माण क्षमता को एक बड़ी मजबूती मिली है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के लिए 18 नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट पेट्रोल वेसल्स (FPVs) के निर्माण की प्रतिस्पर्धी निविदा में L1 (सबसे कम बोलीदाता) के रूप में बाज़ी मार ली है. इस मेगा प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग ₹3,000 करोड़ बताई जा रही है.
इस टेंडर प्रक्रिया में देश के छह प्रमुख शिपयार्ड्स ने भाग लिया था, जो भारतीय शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रुचि को दर्शाता है. विस्तृत तकनीकी और वाणिज्यिक मूल्यांकन के बाद HSL की बोली को सबसे प्रतिस्पर्धी और उपयुक्त पाया गया.
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई रफ्तार
ये सभी फास्ट पेट्रोल वेसल्स पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित की जाएंगी. यह परियोजना सरकार की Atmanirbhar Bharat और Make in India (Defence Shipbuilding) पहल के अनुरूप है.
सूत्रों के अनुसार, औपचारिक अनुबंध आने वाले महीनों में साइन किया जाएगा. पहले जहाज़ का निर्माण समय 30 महीने रखा गया है, जबकि इसके बाद प्रत्येक जहाज़ की डिलीवरी हर 4 महीने के अंतराल पर की जाएगी.
यह परियोजना HSL के लिए पेट्रोल वेसल सेगमेंट में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और स्वदेशी युद्धपोत एवं सुरक्षा जहाज़ निर्माण में कंपनी की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करती है.
नेक्स्ट जेनरेशन FPVs की प्रमुख क्षमताएं
ये नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट पेट्रोल वेसल्स मीडियम-रेंज, हथियारों से लैस सतह पोत होंगी, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय समुद्री परिस्थितियों और उष्णकटिबंधीय वातावरण के अनुसार डिज़ाइन किया गया है.
भारतीय तटरक्षक बल के लिए प्रस्तावित नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट पेट्रोल वेसल्स को विशेष रूप से भारतीय समुद्री परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है. ये पोत 05 मीटर से अधिक गहराई वाले भारतीय जलक्षेत्रों में प्रभावी संचालन में सक्षम होंगे, जिससे तटीय और अपतटीय दोनों क्षेत्रों में इनकी तैनाती संभव होगी.
इसके अलावा, इन वेसल्स को द्वीपीय क्षेत्रों के आसपास निरंतर और प्रभावी गश्त के लिए अनुकूल बनाया गया है, जिससे अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे रणनीतिक इलाकों में समुद्री सुरक्षा को और मज़बूती मिलेगी.
परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए इन जहाज़ों में हेलीकॉप्टर स्टेजिंग-थ्रू सुविधा दी जाएगी. इसके तहत ये पोत ALH Mk-III हेलीकॉप्टर के लिए दिन और रात दोनों समय फ्यूलिंग तथा स्टेजिंग सपोर्ट प्रदान करने में सक्षम होंगे, जिससे लंबी दूरी के निगरानी, खोज एवं बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया अभियानों में भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता में उल्लेखनीय इज़ाफा होगा.
Indian Coast Guard के लिए अहम मिशन रोल
ये FPVs भारतीय तटरक्षक बल के लिए कई अहम समुद्री सुरक्षा और मानवीय अभियानों में इस्तेमाल की जाएंगी, जिनमें मत्स्य संरक्षण और निगरानी (Fisheries Protection), EEZ और तटीय गश्त, तस्करी और समुद्री अपराधों के खिलाफ कार्रवाई, एंटी-पायरेसी ऑपरेशंस, Search & Rescue (SAR), संदिग्ध जहाज़ों की इंटरसेप्शन और समुद्र में फंसे जहाज़ों और क्रू को सहायता शामिल है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ये नेक्स्ट जेनरेशन FPVs भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और द्वीपीय सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती देंगी. साथ ही, यह परियोजना भारत के स्वदेशी रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम को और सशक्त बनाएगी.
₹3,000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट न केवल Hindustan Shipyard Limited के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम साबित होगा.
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