भारतीय नौसेना को मिला नया घातक ASW युद्धपोत INS Anjadip, GRSE ने रचा इतिहास

भारतीय नौसेना को मिला नया एंटी-सबमरीन युद्धपोत INS Anjadip। GRSE की ऐतिहासिक उपलब्धि, 88% स्वदेशी ताकत और घातक ASW क्षमता।

भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी ताकत को आज एक और बड़ी मजबूती मिली है. गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft – अंजदीप (INS Anjadip) को भारतीय नौसेना को सौंप दिया है. यह डिलीवरी चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट में की गई, जहां इसे ईस्टर्न नेवल कमांड के CSO (Tech) रियर एडमिरल गौतम मारवाह, VSM ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया.

GRSE की ऐतिहासिक उपलब्धि

INS अंजदीप, GRSE द्वारा बनाया गया 115वां युद्धपोत है और भारतीय नौसेना को सौंपा गया 77वां युद्धपोत हैं. खास बात यह है कि यह 2025 में GRSE द्वारा डिलीवर किया गया पाँचवां युद्धपोत है.

इससे पहले इसी साल GRSE ने एडवांस्ड गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS हिमगिरि, INS अर्नाला, INS एंड्रोथ और INS इक्षक डिलीवर किए थे, जो अब नौसेना में कमीशन हो चुके हैं.

एक ही साल में इतने युद्धपोतों की डिलीवरी किसी भी भारतीय शिपयार्ड के लिए बेहद दुर्लभ उपलब्धि मानी जा रही है.

भारतीय नौसेना को मिला नया एंटी-सबमरीन युद्धपोत INS Anjadip। GRSE की ऐतिहासिक उपलब्धि, 88% स्वदेशी ताकत और घातक ASW क्षमता।

आत्मनिर्भर भारत की जीती-जागती मिसाल

INS अंजदीप में करीब 88% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. इसमें GRSE द्वारा निर्मित 30 मिमी नेवल सरफेस गन लगी है. यह जहाज भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विज़न को समुद्र में उतारने का मजबूत उदाहरण है.

INS Anjadip की घातक क्षमताएं

ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट श्रेणी के ये युद्धपोत तटीय इलाकों में पनडुब्बियों की खोज, निगरानी और हमला करने में सक्षम हैं. एयरक्राफ्ट के साथ मिलकर कोऑर्डिनेटेड एंटी-सबमरीन ऑपरेशन कर सकते हैं. इनमें कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, लाइटवेट टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट लगाए गए हैं.

INS अंजदीप में 57 नौसैनिकों की तैनाती हो सकती है, जिनमें 7 अधिकारी शामिल हैं. शैलो वॉटर में घातक शिकारी जहाज में तीन वाटरजेट्स लगे हैं. केवल 2.7 मीटर ड्राफ्ट की वजह से यह उथले पानी में भी आसानी से ऑपरेट कर सकता है. यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा वाटरजेट आधारित युद्धपोत है. यही क्षमता इसे दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए खास तौर पर खतरनाक बनाती है.

भारतीय नौसेना को मिला नया एंटी-सबमरीन युद्धपोत INS Anjadip। GRSE की ऐतिहासिक उपलब्धि, 88% स्वदेशी ताकत और घातक ASW क्षमता।

पुराने INS Anjadip का पुनर्जन्म

यह जहाज 2003 में सेवामुक्त हुए पेट्या क्लास INS अंजदीप का पुनर्जन्म है. इसका नाम कर्नाटक के कारवार तट के अंजदीप द्वीप पर रखा गया है. यह नाम भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

GRSE का भविष्य का रोडमैप

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) फिलहाल एक बड़े और महत्वाकांक्षी शिपबिल्डिंग फेज़ में प्रवेश कर चुका है. आने वाले वर्षों में शिपयार्ड में कुल 12 युद्धपोतों का निर्माण कार्य चल रहा है, जिनमें शामिल हैं—

2 एडवांस्ड P-17A स्टील्थ फ्रिगेट है, जो भारतीय नौसेना की ब्लू-वॉटर क्षमता को और मजबूत करेंगे.

5 एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC), जो तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों की रीढ़ बनेंगे.

1 सर्वे वेसल (लार्ज), जो समुद्री सर्वेक्षण और रणनीतिक मैपिंग में अहम भूमिका निभाएगा.

4 नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NG-OPV), जो समुद्री निगरानी और सुरक्षा अभियानों को नई धार देंगे.

इसके अलावा, GRSE केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है. अंतरराष्ट्रीय शिपबिल्डिंग बाजार में भी इसकी मजबूत मौजूदगी दिखाई दे रही है. इसके अलावा, शिपयार्ड एक जर्मन ग्राहक के लिए एक दर्जन बहुउद्देशीय पोत, चार अनुसंधान पोत और 13 हाइब्रिड फेरी का निर्माण कर रहा है. जीआरएसई को इस वित्तीय वर्ष में 5 नई पीढ़ी के कोरवेट के निर्माण के लिए एक प्रतिष्ठित अनुबंध के पूरा होने की भी उम्मीद है.

कुल मिलाकर, GRSE का यह रोडमैप न सिर्फ भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने वाला है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, मेक-इन-इंडिया और भारत को एक वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होता है.

INS अंजदीप का शामिल होना सिर्फ एक जहाज की एंट्री नहीं, बल्कि यह भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की एक बड़ी जीत है. समुद्र में अब भारत की निगाह और भी तेज़ हो चुकी है.

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