CHINA ने उड़ाया दुनिया का सबसे बड़ा “ड्रोन मदरशिप” Jiutian, हवा में छोड़ेगा दर्जनों स्वार्म ड्रोन
CHINA ने मानवरहित युद्ध प्रणालियों के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने हाई-फ्लाइंग ड्रोन मदरशिप ‘Jiutian ’(जियुतियान) की सफल उड़ान की पुष्टि की है. यह ड्रोन न सिर्फ आकार और क्षमता में अब तक का सबसे बड़ा UAV माना जा रहा है, बल्कि इसे भविष्य की ड्रोन-स्वार्म वारफेयर के लिए एक गेम-चेंजर प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है.
रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक Jiutian एक ऐसा हवाई प्लेटफॉर्म है, जो लंबी दूरी तक उड़ान भरने के साथ-साथ एक साथ दर्जनों छोटे ड्रोन लॉन्च और नियंत्रित कर सकता है.
क्या है Jiutian ड्रोन मदरशिप?
Jiutian को चीन का हाई-ऑल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) UAV बताया जा रहा है. इसका डिजाइन पारंपरिक ड्रोन से अलग है, क्योंकि यह खुद एक “मदरशिप” की तरह काम करता है.
जियु टियान का अर्थ है ऊंचा आकाश. इस ड्रोन को शांक्सी अनमैन्ड इक्विपमेंट टेक्नोलॉजी (Shaanxi Unmanned Equipment Technology) द्वारा बनाया जा रहा है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, Jiu Tian ने नवंबर 2024 में चीन के प्रमुख झुहाई एयर शो में अपनी शुरुआत की.
चीन का दावा है कि Jiu Tian 12 घंटे तक उड़ सकता है. इस ड्रोन की रेंज 7000 किलोमीटर है. यह 15000 मीटर ऊंचा उड़ने की काबिलियत रखता है.
इसका टेक-ऑफ वजन 16000 किलोग्राम है और पेलोड क्षमता 6000 किलोग्राम है यानी वाहन का इस्तेमाल surveillance technology से लेकर गोला-बारूद तक की आपूर्ति करने के लिए किया जा सकता है.
चीनी सरकारी मीडिया पर जारी एक वीडियो के अनुसार, पेलोड में 100 से ज्यादा छोटे ड्रोन, कामिकेज UAVs, क्रूज मिसाइलें और PL-12E जैसी मिसाइलें शामिल हो सकती हैं.
इतना ही नहीं यह ड्रोन दुश्मन के रडार से बचते हुए मिसाइल अटैक भी कर सकता है. इस ड्रोन को न सिर्फ युद्ध के लिए बल्कि इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स, border surveillance और आपदा राहत के लिए भी डिजाइन किया गया है.
इसमें AI-programmed drone swarms launcher system है. यह एक साथ कई दिशाओं में हमला कर सकता है. स्टील्थ टेक्नोलॉजी के चलते दुश्मन के रडार को चकमा दे सकता है
Jiu Tian 82-फुट के पंखों और 16-टन के फ्रेम वाला एक विशाल प्लेटफ़ॉर्म है. इसका रडार क्रॉस-सेक्शन (आरसीएस) संभवतः महत्वपूर्ण है.
यह ड्रोन बिना पायलट के, सैटेलाइट और ग्राउंड कंट्रोल के जरिए संचालित किया जाता है.
ड्रोन स्वार्म लॉन्च करने की क्षमता

Jiutian की सबसे बड़ी खासियत इसका आंतरिक मॉड्यूलर बे है, जहां से यह एक साथ बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन लॉन्च कर सकता है. ये ड्रोन अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकते हैं, जैसे-
- खुफिया निगरानी
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर
- कम्युनिकेशन रिले
- टारगेट पहचान
- कामिकाज़े या लोइटरिंग म्यूनिशन अटैक
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ड्रोन स्वार्म पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड कर सकते हैं.
हथियार और सैन्य भूमिका
Jiutian केवल ड्रोन कैरियर ही नहीं है. इसमें अंडर-विंग हार्डपॉइंट्स भी मौजूद हैं, जिन पर एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, एंटी-शिप हथियार, गाइडेड बम, आधुनिक सेंसर और निगरानी उपकरण, लगाए जा सकते हैं. इससे यह प्लेटफॉर्म लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक और कमांड-कंट्रोल नोड की भूमिका भी निभा सकता है.
रणनीतिक महत्व
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार Jiutian का विकास चीन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह भविष्य के युद्ध को मानवरहित सिस्टम और AI-आधारित स्वार्म टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाना चाहता है.
इसकी लंबी रेंज और हाई-ऑल्टीट्यूड क्षमता इसे ताइवान स्ट्रेट, दक्षिण चीन सागर, पूर्वी एशिया के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सैन्य अभियानों के लिए बेहद उपयोगी बनाती है.
पहली उड़ान और आगे की राह
चीन द्वारा Jiutian की पहली उड़ान सार्वजनिक किए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि यह परियोजना केवल कागज़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक ऑपरेशनल सिस्टम बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है.
आने वाले समय में इसके और उन्नत संस्करण, ज्यादा ऑटोमेशन और बड़े ड्रोन स्वार्म के साथ तैनात किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
Jiutian ड्रोन मदरशिप दिखाता है कि भविष्य के युद्धों में मानव रहित प्लेटफॉर्म, ड्रोन स्वार्म और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर कितनी अहम भूमिका निभाने वाले हैं. चीन का यह कदम वैश्विक सैन्य संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है और अन्य देशों को भी इसी दिशा में तेजी से काम करने के लिए मजबूर करेगा.
चीन की ‘ड्रोन मदरशिप’ Jiu Tian: भारत के लिए नई चुनौती?

चीन की इस तरह की हथियारों का सीधा असर भारत पर भी होता है. क्योंकि चीन का आक्रामक रुख कभी भी भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा सकता है. हाल ही में भारत –पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में चीन ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया है. ऐसे में भारत के लिए एक बड़ा खतरा उसके सामने है..
हालांकि सेंसर, जैमर और मिसाइलों के मिश्रण का उपयोग करके ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन झुंडों को बेअसर करने में भारत की हालिया सफलता साबित करती है कि Integrated एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन-भारी हमलों को खत्म कर सकती है. भले ही यह 15,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ता हो, लेकिन यह पहुंच से बाहर नहीं है.
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