अमेरिका की USCC का बड़ा दावा: भारत-पाक संघर्ष का फायदा उठाकर China ने की हथियारों की ‘लाइव टेस्टिंग’

अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: भारत-पाक तनाव के दौरान चीन ने हथियारों का 'लाइव टेस्ट' किया, फर्जी सोशल मीडिया कैंपेन भी चलाया

अमेरिका की यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमिशन (USCC) की ताज़ा रिपोर्ट में China पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, China ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात का फायदा उठाते हुए अपनी नई हथियार प्रणालियों का वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में “लाइव टेस्ट” किया.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने सीमा क्षेत्र में निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और ड्रोन तकनीक का उपयोग वास्तविक संघर्ष जैसे हालात में परखने के लिए किया.

USCC रिपोर्ट में China पर क्या आरोप लगाए गए?

USCC की रिपोर्ट में कई प्रमुख दावे किए गए हैं:

भारत-पाकिस्तान तनाव का इस्तेमाल ‘वॉर-लैब’ की तरह

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने भारत-पाक स्थिति को एक “प्रयोगशाला” की तरह उपयोग किया.

विशेष रूप से

  • PLA ने निगरानी ड्रोन, जासूसी प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक-इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया.
  • चीन ने वास्तविक समय में भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियों की निगरानी की.
  • इन गतिविधियों का उद्देश्य अपनी नई सिस्टम्स की क्षमता को “जमीन पर परखना” था.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह तरीका “क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा” है.

राफेल जेट्स के खिलाफ फेक सोशल मीडिया कैंपेन

USCC की रिपोर्ट का दूसरा बड़ा खुलासा यह है कि चीन ने

  • फ्रांस के Rafale Fighter Jets के खिलाफ डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन चलाया.
  • इसके लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए गए.
  • वीडियो-गेम की तस्वीरों और AI जनरेटेड इमेजेस का उपयोग कर दावे किए गए कि राफेल “चीन के लड़ाकू विमानों से कमजोर” है.
  • चीन का उद्देश्य राफेल की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना और अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में अपनी पकड़ बढ़ाना था.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह अभियान दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहा.

यह चीन क्यों कर रहा है? रिपोर्ट का विश्लेषण

USCC ने अपने विश्लेषण में कहा कि चीन अपने नए लड़ाकू विमान J-31, J-10CE और J-35 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देना चाहता है.

राफेल जेट्स इस समय विश्व के कई रक्षा बाजारों में चीन का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी हैं.

चीन की राज्य-समर्थित कंपनियाँ हथियारों की बिक्री बढ़ाने के लिए “सूचना युद्ध (Information Warfare)” का इस्तेमाल कर रही हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की यह रणनीति इन्फॉर्मेशन ओपरेशन + टेक्नोलॉजी टेस्टिंग का मिश्रण है.

भारत पर इसका असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत राफेल जेट्स का प्रमुख ऑपरेटर है, इसलिए चीन का फेक कैंपेन भारत को भी निशाना बनाता रहा. भारत-पाक तनाव का चीन द्वारा उपयोग किया जाना भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ड्रोन टेस्टिंग से चीन को भारतीय सैन्य रणनीतियों की समझ मिल सकती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को इस प्रकार की डिजिटल हेराफेरी और सीमा-पार तकनीकी जासूसी पर अतिरिक्त निगरानी रखनी चाहिए. USCC की रिपोर्ट से साफ है कि चीन पारंपरिक युद्ध से ज्यादा हाइब्रिड वॉरफेयर—टेक्नोलॉजी, जानकारी और प्रॉपेगेंडा पर ध्यान दे रहा है.

भारत-पाक तनाव का इस्तेमाल हथियारों की टेस्टिंग के लिए करना और राफेल के खिलाफ फेक कैंपेन चलाना चीन की विस्तारवादी और आक्रामक रणनीति की ओर इशारा करता है. अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे “डिजिटल युद्ध का नया चेहरा” बता रहे हैं.

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