Bangladesh में Sheikh Hasina को मौत की सजा, भारत से प्रत्यर्पण की मांग तेज

शेख हसीना को मौत की सजा, भारत से तत्काल प्रत्यर्पण की मांग

Bangladesh में राजनीतिक तनाव सोमवार को चरम पर पहुंच गया, जब इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई.

फैसले के बाद ढाका में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है और कई इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.

यह फैसला ऐसे समय आया है जब हसीना पहले से ही देश से बाहर हैं और भारत में मौजूद बताई जा रही हैं. इसी कारण ढाका ने आधिकारिक रूप से भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी कर दी है.

क्या कहा अदालत ने?

ICT के मुताबिक,

2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुए मास हिंसा, फायरिंग और मौतों में हसीना की कमान्ड रिस्पॉन्सिबिलिटी थी.

कोर्ट ने कहा कि हसीना ने “अत्यधिक बल” के इस्तेमाल को रोका नहीं और न ही किसी स्वतंत्र जांच को होने दिया. अदालत ने उन्हें अनुपस्थिति में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया.

फैसले के तुरंत बाद ढाका की कई अदालतों और सरकारी भवनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई. राजधानी के कई हिस्सों में धारा-144 जैसे प्रतिबंध लागू हैं.

शेख हसीना की प्रतिक्रिया — फैसला खारिज, कहा ‘राजनीतिक साज़िश’

शेख हसीना को मौत की सजा, भारत से तत्काल प्रत्यर्पण की मांग

भारतीय मीडिया से बातचीत में शेख हसीना ने कोर्ट के फैसले को “राजनीतिक रूप से प्रेरित”, “कंगारू कोर्ट” और “पूर्वनियोजित साज़िश” बताया है.

उनके अनुसार,

यह ट्रायल “न्यायालय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का मंच” था. उन्हें अपनी पसंद का वकील रखने की अनुमति नहीं दी गई. वे कहती हैं कि बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार, जिसमें प्रमुख चेहरा मोहम्मद यूनुस हैं, उनके खिलाफ राजनीतिक एजेंडा चला रही है.

हसीना ने साफ कहा कि वे किसी अंतरराष्ट्रीय मंच, जैसे कि ICC, में अपना पक्ष रखना चाहेंगी क्योंकि उन्हें वहां निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद है.

Bangladesh ने भारत से मांगा प्रत्यर्पण

विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ढाका ने भारत को औपचारिक रूप से अनुरोध भेजा है कि हसीना को तुरंत बांग्लादेश को सौंपा जाए. उन्हें सजा के बाद “फरार अपराधी” माना गया है.

बांग्लादेश सरकार का दावा है कि प्रत्यर्पण दो देशों के बीच दोस्ती और “कानूनी सहयोग” के अनुरूप होगा.  

बांग्लादेश में माहौल तनावपूर्ण

ढाका में हाई अलर्ट है और अदालत परिसर से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है. सोशल मीडिया पर हसीना समर्थकों और सरकार समर्थकों के बीच गंभीर तनाव है. अंतरिम सरकार पर विपक्षी दलों का आरोप है कि वे सेना और बाहरी समूहों के दबाव में काम कर रही है. देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की आशंका व्यक्त की जा रही है.

आगे क्या?

हसीना की कानूनी टीम बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकती है. अगर भारत प्रत्यर्पण पर कोई कदम उठाता है, तो क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रियाओं का भी असर पड़ेगा, क्योंकि ट्रायल की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.

शेख हसीना को मौत की सजा बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बड़ा और विवादित राजनीतिक न्यायिक फैसला है. इससे न सिर्फ ढाका की राजनीति में उथल-पुथल मची है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी बड़ा असर पड़ सकता है. आने वाले दिनों में यह मामला पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को प्रभावित करेगा.

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