बांग्लादेश ने खरीदी चीन की SY-400 मिसाइल प्रणाली, दक्षिण एशिया में बढ़ा तनाव और शक्ति संतुलन में बदलाव

बांग्लादेश ने खरीदी चीन की SY-400 मिसाइल प्रणाली, दक्षिण एशिया में बढ़ा तनाव

दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. बांग्लादेश ने चीन से अत्याधुनिक SY-400 टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली खरीदने का फैसला किया है — जो 400 किलोमीटर तक सटीक वार करने में सक्षम है. यह सौदा न केवल बांग्लादेश की सैन्य क्षमता को नई ऊँचाई देगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है.

क्या है SY-400 मिसाइल प्रणाली?

SY-400 चीन की प्रमुख रक्षा कंपनी China Aerospace Science and Industry Corporation (CASIC) द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक मॉड्यूलर ग्राउंड-टू-ग्राउंड मिसाइल सिस्टम है.

यह एक मोबाइल लॉन्चर पर आधारित प्रणाली है, जो दो अलग-अलग प्रकार की मिसाइलें दाग सकती है. यह एक मॉड्यूलर ट्रक-माउंटेड लॉन्चर है जो जरूरत के हिसाब से या तो आठ SY-400 गाइडेड रॉकेट्स या दो BP-12A बैलिस्टिक मिसाइलें लेकर सटीक शॉर्ट-से-लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक कर सकता है.

इसकी मारक क्षमता 200 से 400 किलोमीटर तक मानी जाती है, और यह इन्शर्टियल नेविगेशन सिस्टम (INS) तथा सैटेलाइट गाइडेंस (BeiDou/GPS) तकनीक से निर्देशित होती है. इससे इसे बेहद सटीक लक्ष्यभेदन की क्षमता मिलती है.

बांग्लादेश के लिए क्यों अहम है यह सौदा

बांग्लादेश ने खरीदी चीन की SY-400 मिसाइल प्रणाली, दक्षिण एशिया में बढ़ा तनाव

बांग्लादेश की सेना लंबे समय से लंबी दूरी तक प्रहार करने वाली मिसाइल प्रणाली की तलाश में थी. SY-400 के आने से उसे अब “प्रिसिजन स्ट्राइक कैपेबिलिटी” मिलेगी — यानी दूर बैठे दुश्मन ठिकानों, एयरबेस, और कमांड सेंटर पर निशाना साधने की क्षमता. यह सौदा चीन-बांग्लादेश रक्षा सहयोग का नया प्रतीक माना जा रहा है.

इसके साथ ही, चीन का उद्देश्य दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को और गहरा करना भी बताया जा रहा है.

विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक दूरी बढ़ सकती है, क्योंकि यह प्रणाली भारत की उत्तर-पूर्वी सीमाओं तक आसानी से पहुंच सकती है.

चीन की रणनीति — हथियारों के ज़रिए प्रभाव बढ़ाना

चीन पहले ही पाकिस्तान, म्यांमार और अब बांग्लादेश जैसे देशों को उन्नत हथियार प्रणालियाँ बेचकर दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. SY-400 प्रणाली का निर्यात इस नीति का हिस्सा है, जिसके ज़रिए बीजिंग न केवल आर्थिक बल्कि सैन्य-रणनीतिक प्रभाव भी फैला रहा है.

भारत के लिए संकेत

भारत के लिए यह सौदा एक चेतावनी भरा संकेत है. हालाँकि बांग्लादेश भारत का पारंपरिक मित्र देश है, लेकिन इस तरह की मिसाइल प्रणाली की तैनाती क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपनी सीमाओं पर उन्नत वायु-रक्षा प्रणाली और निगरानी तंत्र को और मज़बूत करना पड़ सकता है.

SY-400 की खासियत इसकी मोबिलिटी और तेज़ तैनाती है — यानी यह ट्रक-माउंटेड प्रणाली कहीं भी तैनात होकर कुछ ही मिनटों में लॉन्च की जा सकती है.

यह विशेषता इसे “शूट-एंड-स्कूट” क्षमता देती है, जिससे इसे ट्रैक करना कठिन हो जाता है.

सैन्य विश्लेषक इसे “आर्टिलरी और मिसाइल सिस्टम का मिश्रण” मानते हैं — एक ऐसा हथियार जो युद्धक्षेत्र के नियम बदल सकता है.

बांग्लादेश की यह खरीद सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है. यह दर्शाता है कि दक्षिण एशिया अब केवल पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं रहा — बल्कि दूर-मारक, हाई-प्रिसिजन मिसाइलों की दौड़ शुरू हो चुकी है. भारत, चीन और उनके पड़ोसी अब एक नए मिसाइल युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ हर सौदा एक संभावित शक्ति संतुलन को झटका दे सकता है.

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