Putin का ‘डूम्सडे’ हथियार सक्रिय! Russia ने किया Poseidon न्यूक्लियर टॉरपीडो का सफल परीक्षण

पुतिन का ‘डूम्सडे वेपन’ सक्रिय – रूस ने किया Poseidon न्यूक्लियर टॉरपीडो का सफल परीक्षण

दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की दहलीज पर खड़ी है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की है कि देश ने अपने परमाणु-सक्षम सुपर टॉरपीडो “Poseidon” का सफल परीक्षण किया है. यह वही घातक हथियार है जिसे पश्चिमी मीडिया “डूम्सडे वेपन” कह रहा है.

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, Poseidon टॉरपीडो एक न्यूक्लियर-प्रोपेल्ड अंडरवॉटर ड्रोन है, जो महीनों तक समुद्र के भीतर छिपा रह सकता है और दुश्मन के तटीय शहरों पर ऐसा हमला कर सकता है जो पूरे क्षेत्र को रेडियोधर्मी सुनामी (Radioactive Tsunami) में बदल दे.

पुतिन का दावा: ‘Poseidon ने सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए’

विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, पुतिन ने कहा कि “Poseidon सुपर टॉरपीडो ने अपना परीक्षण पूरा कर लिया है और इसकी न्यूक्लियर पावर यूनिट ने सफलतापूर्वक काम किया.”

यह परीक्षण रूस की एक विशेष परमाणु पनडुब्बी से किया गया, जो इस टॉरपीडो को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन की गई है.

रूसी मीडिया के अनुसार, यह हथियार 2 मेगाटन से अधिक की क्षमता रखता है — यानी यह एक ही वार में किसी बड़े शहर को पूरी तरह नष्ट करने की ताकत रखता है.

क्या है Poseidon टॉरपीडो की खासियत?

  • यह दुनिया का पहला न्यूक्लियर-पावर्ड, अनमैन्ड अंडरवॉटर टॉरपीडो है.
  • यह समुद्र के अंदर हजारों किलोमीटर तक यात्रा कर सकता है.
  • इसका लक्ष्य दुश्मन के तटीय शहर, नौसैनिक अड्डे और पनडुब्बी डॉक हैं.
  • इसकी रफ्तार इतनी तेज़ और गहराई इतनी अधिक है कि मौजूदा सोनार सिस्टम्स इसे ट्रैक नहीं कर सकते.
  • एक बार सक्रिय होने पर, यह अपने मार्ग को स्वायत्त रूप से बदलने में सक्षम है.

डर की वजह: रेडियोधर्मी सुनामी का खतरा

The Guardian की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर Poseidon का प्रयोग युद्ध में किया गया, तो यह समुद्र के नीचे विस्फोट कर एक विशाल रेडियोधर्मी लहर पैदा कर सकता है — जो पूरे तटीय क्षेत्र को नष्ट कर सकती है और वर्षों तक विकिरण छोड़ती रहेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का हथियार केवल विनाश के लिए नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव (Psychological Deterrence) बनाने के लिए भी तैयार किया गया है.

अमेरिका और रूस के बीच नई परमाणु होड़

Poseidon परीक्षण के कुछ ही दिनों बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ऐलान किया कि अमेरिका 30 साल बाद फिर से “लाइव न्यूक्लियर टेस्ट” करेगा.

इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि दोनों महाशक्तियों के बीच न्यूक्लियर आर्म्स रेस अब खुले तौर पर वापस आ चुकी है.

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और रूस दोनों अपने पुराने समझौतों से पीछे हटते हैं, तो यह नए शीत युद्ध (New Cold War) की शुरुआत हो सकती है.

समुद्र से शुरू होगी अगली परमाणु लड़ाई?

Poseidon जैसे हथियार दुनिया के सैन्य परिदृश्य को बदल सकते हैं. अब युद्ध सिर्फ हवा या ज़मीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महासागर भी परमाणु संघर्ष का नया मैदान बन सकते हैं.

रूस के इस परीक्षण ने न केवल अमेरिका, बल्कि NATO देशों को भी सतर्क कर दिया है. कई देशों ने कहा है कि यह परीक्षण वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.

रूस का Poseidon प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि अब परमाणु हथियारों की परिभाषा बदल रही है. जहाँ पहले परमाणु मिसाइलें आसमान में उड़ती थीं, अब समुद्र की गहराइयों से आने वाला यह खतरा अदृश्य और अनियंत्रित है.

अगर यह हथियार कभी इस्तेमाल हुआ — तो यह न केवल एक देश, बल्कि पूरे ग्रह के लिए विनाशकारी परिणाम लेकर आएगा.

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