Lockheed Martin और Google मिलकर बनाएंगे “AI Fortress”, अब राष्ट्रीय सुरक्षा में उतरेगा Generative AI

🧠 Meta Title: Lockheed Martin और Google Public Sector मिलकर बनाएंगे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए On-Premise Generative AI सिस्टम

अमेरिकी रक्षा कंपनी Lockheed Martin और Google Public Sector ने एक ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा की है, जिसके तहत दोनों कंपनियाँ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए “On-Premise Generative AI Infrastructure” विकसित करेंगी.

यह कदम अमेरिकी रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित और नियंत्रित उपयोग की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है.

क्या है Lockheed Martin और Google का यह पहल?

Lockheed Martin और Google का यह सहयोग Generative AI को क्लाउड से बाहर निकालकर सुरक्षित ऑन-प्रिमाइसेस (on-premise) वातावरण में लाने का है — यानी, AI को इंटरनेट या सार्वजनिक सर्वर से पूरी तरह अलग, सुरक्षित नेटवर्क (air-gapped systems) पर चलाया जाएगा.

इसका उद्देश्य है कि रक्षा एजेंसियाँ और राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान संवेदनशील डेटा का विश्लेषण और प्रसंस्करण AI की शक्ति से, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित माहौल में कर सकें.

क्या बोले Lockheed Martin के अधिकारी

Lockheed Martin के AI Factory प्रोग्राम के निदेशक ने बताया,

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में डेटा-आधारित निर्णय और मिशन-सपोर्ट को एक नए स्तर तक ले जाएगी.

Google Public Sector का योगदान

Google इस प्रोजेक्ट में अपनी Gemini AI मॉडल फैमिली और Vertex AI जैसे प्लेटफॉर्म्स को Lockheed Martin के इंटरनल इंफ्रास्ट्रक्चर में एकीकृत करेगा.

इन AI टूल्स की मदद से Lockheed Martin के इंजीनियर और रक्षा-विश्लेषक निम्नलिखित कार्य कर सकेंगे:

  • विशाल डेटा सेट्स का रियल-टाइम एनालिसिस
  • जटिल रक्षा प्रोजेक्ट्स में डिज़ाइन और प्रोटोटाइप जनरेशन
  • लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए स्मार्ट ऑप्टिमाइज़ेशन

AI आधारित सिमुलेशन और थ्रेट प्रेडिक्शन

Google Public Sector की CEO ने कहा,

“हम राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में ऐसी AI क्षमताएँ लाना चाहते हैं जो केवल स्मार्ट नहीं, बल्कि सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में कार्य करने योग्य हों”

On-Premise AI क्यों जरूरी है?

सामान्य रूप से, जेनरेटिव AI मॉडल क्लाउड पर चलते हैं — लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी संवेदनशील परियोजनाओं में डेटा को बाहरी नेटवर्क पर भेजना जोखिम भरा होता है.

On-Premise AI इस समस्या को खत्म करता है क्योंकि:

  • सभी डेटा और मॉडल संस्थान के अपने सर्वर पर रहते हैं
  • इंटरनेट या पब्लिक क्लाउड से कोई कनेक्शन नहीं होता
  • साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता पर पूरी तरह नियंत्रण रहता है

यह व्यवस्था रक्षा एजेंसियों को अत्यधिक संवेदनशील ऑपरेशन — जैसे मिशन प्लानिंग, थ्रेट एनालिसिस, और इंटेलिजेंस फ्यूज़न — में AI का उपयोग करने की सुविधा देती है.

भविष्य की दिशा

Lockheed Martin ने बताया कि आने वाले महीनों में इस AI प्रणाली को पहले अनक्लासिफाइड ऑन-प्रिमाइसेस वातावरण में टेस्ट किया जाएगा, और सफल होने पर इसे क्लासिफाइड सिस्टम्स में लागू किया जाएगा.

यह सहयोग आगे चलकर अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) और सहयोगी देशों की सेनाओं तक भी विस्तारित किया जा सकता है.

भारत और विश्व के लिए संकेत

इस पहल से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में रक्षा उद्योगों में “AI + सुरक्षा + लोकल डेटा सेंटर” मॉडल की मांग तेजी से बढ़ेगी.

भारत जैसे देशों के लिए यह एक प्रेरक कदम है — क्योंकि भारतीय रक्षा क्षेत्र भी अब स्वदेशी AI आधारित प्लेटफॉर्म्स और सुरक्षित डेटा नेटवर्क की दिशा में बढ़ रहा है.

Lockheed Martin और Google Public Sector का यह कदम सिर्फ तकनीकी साझेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की युद्ध रणनीति का संकेत है. Generative AI अब केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का नया हथियार बनता जा रहा है — और आने वाले दशक में “AI-ड्रिवन डिफेंस” ही अगली बड़ी क्रांति होगी.

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