भारतीय तटरक्षक बल को मिली दो नई तेज गश्ती नौकाएं – ICGS अजीत और ICGS अपराजित
भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती मिली है. भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में दो अत्याधुनिक तेज गति की गश्ती नौकाओं ICGS अजीत और ICGS अपराजित का सफल जलावतरण किया. यह उपलब्धि देश की तटीय निगरानी क्षमता और स्वदेशी पोत निर्माण शक्ति के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
आठ गश्ती नौकाओं की श्रृंखला का हिस्सा
दोनों पोत GSL द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित आठ तेज गश्ती नौकाओं (FPVs) की श्रृंखला के सातवें और आठवें जहाज़ हैं. इनका निर्माण “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत किया गया है, जो घरेलू रक्षा उद्योग और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देता है.
अत्याधुनिक तकनीक और उच्च गतिशीलता

पूरी तरह भारतीय डिज़ाइन पर आधारित ये पोत 52 मीटर लंबे हैं और इनका विस्थापन 320 टन है.
इन नौकाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये देश में अपनी श्रेणी की पहली नौकाएं हैं जो कंट्रोल्ड पिच प्रोपेलर (CPP) तकनीक से लैस हैं, जिससे बेहतर गतिशीलता और प्रणोदन दक्षता प्राप्त होती है.
ये गश्ती नौकाएं विभिन्न भूमिकाओं में काम करने में सक्षम हैं, जैसे:
- तटीय गश्त और निगरानी
- तस्करी व समुद्री डकैती रोकथाम
- मछुआरों की सुरक्षा
- खोज और बचाव अभियान (Search & Rescue)
- विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा
- स्वदेशी निर्माण की नई मिसाल

जलावतरण समारोह के दौरान, श्रीमती मंजू शर्मा ने दोनों नौकाओं का जलावतरण किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) डॉ. मयंक शर्मा, तटरक्षक बल-पश्चिम क्षेत्र के कमांडर महानिरीक्षक भीष्म शर्मा, और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.
डॉ. मयंक शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि यह परियोजना न केवल समुद्री सुरक्षा को सशक्त बनाएगी, बल्कि घरेलू उद्योग, रोज़गार सृजन और एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती देगी.
राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम
इन दो नौकाओं के जलावतरण के साथ, भारतीय तटरक्षक बल ने अपने आधुनिक तेज गति वाले बेड़े में नया विस्तार किया है. इससे भारत के विशाल समुद्री तट की निगरानी और परिचालन तत्परता में अभूतपूर्व सुधार होगा. साथ ही, यह पहल देश के अगली पीढ़ी के स्वदेशी रक्षा पोत निर्माण में GSL की अग्रणी भूमिका को और मजबूत बनाती है.
ICGS अजीत और ICGS अपराजित का जलावतरण भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे में एक अहम उपलब्धि है.mयह न केवल तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि भारत की “आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण” नीति को भी नई दिशा देगा.
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