America 30 साल बाद करेगा “LIVE” परमाणु परीक्षण, राष्ट्रपति Donald Trump ने की घोषणा

डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरू की नई परमाणु दौड़ – अमेरिका 30 साल बाद करेगा लाइव न्यूक्लियर टेस्ट

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है. America के राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि अमेरिका अब लगभग तीन दशकों के बाद फिर से लाइव परमाणु परीक्षण करेगा.

यह घोषणा न सिर्फ़ America की पुरानी नीति से अलग है, बल्कि पूरी दुनिया को एक नई परमाणु दौड़ (Nuclear Race) में धकेलने वाली साबित हो सकती है. अब तक अमेरिका सिर्फ़ सिमुलेशन (computer-based simulation) के ज़रिए अपने परमाणु हथियारों की विश्वसनीयता जांचता था.

लेकिन अब “लाइव टेस्ट” यानी वास्तविक विस्फोट करने की योजना ने संकेत दे दिए हैं कि वॉशिंगटन अपनी डिटरेंस क्षमता को और मजबूत दिखाना चाहता है.

क्यों बढ़ा तनाव?

रूस और चीन दोनों ही हाल के वर्षों में नए न्यूक्लियर टेस्ट-साइट्स तैयार कर रहे हैं.चीन के Lop Nur Test Site और रूस के Novaya Zemlya Base में हाल में नई गतिविधियां देखी गई हैं. जिनमें संभावित टेस्ट-बंकर और मॉनिटरिंग स्टेशन शामिल हैं.

अमेरिकी खुफिया समुदाय का मानना है कि बीजिंग और मॉस्को “लो-यील्ड न्यूक्लियर वॉरहेड” तकनीक पर काम कर रहे हैं, यानी ऐसे हथियार जो सीमित क्षेत्र में अधिक सटीक और सामरिक (Tactical) हमले करने में सक्षम हों.

इसी के जवाब में अमेरिका अब यह दिखाना चाहता है कि वह “न्यूक्लियर डिटरेंस” (परमाणु निरोधक शक्ति) में पीछे नहीं है.

कब और क्यों रुके थे परमाणु परीक्षण?

1996 में जब Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty (CTBT) पर हस्ताक्षर हुए, तो लगभग सभी प्रमुख परमाणु शक्तियों ने अपने परीक्षण रोक दिए.

अब तक 2,000 से अधिक परमाणु परीक्षण दुनिया भर में किए जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज़्यादा अमेरिका (1,032), रूस (715), फ्रांस (210) और चीन (45) शामिल हैं.

भारत और पाकिस्तान ने 1998 में अपने आख़िरी परीक्षण किए थे. लेकिन CTBT को अमेरिका, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और ईरान ने अब तक पूरी तरह से मंज़ूर नहीं किया है.

अब कौन-कौन है परमाणु ताकत?

वर्तमान में दुनिया में 9 परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र हैं- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान, इज़राइल और उत्तर कोरिया.

इनमें अमेरिका और रूस के पास कुल वैश्विक परमाणु शस्त्रागार का 90% से अधिक हिस्सा है. चीन तेज़ी से अपनी परमाणु मिसाइल क्षमता बढ़ा रहा है और 2035 तक उसके पास 1,500 वारहेड्स तक होने का अनुमान है.

ट्रंप की घोषणा क्यों खतरनाक मानी जा रही है

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प का यह कदम सैन्य-संतुलन को अस्थिर कर सकता है. कई देशों को यह संकेत मिलेगा कि “अगर अमेरिका खुद प्रतिबंध तोड़ सकता है, तो हम क्यों नहीं?”

इससे न केवल नए हथियार परीक्षणों की श्रृंखला शुरू हो सकती है, बल्कि परमाणु प्रसार (Nuclear Proliferation) पर नियंत्रण के दशकों पुराने प्रयासों पर भी पानी फिर सकता है.

आने वाला दशक खतरनाक रूप से निर्णायक

अमेरिका का यह संभावित “लाइव न्यूक्लियर टेस्ट” 21वीं सदी की नई हथियार होड़ की शुरुआत बन सकता है. रूस पहले ही हाइपरसोनिक और सामरिक परमाणु मिसाइलें तैनात कर चुका है, और चीन भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में अगर अमेरिका वास्तव में यह कदम उठाता है, तो परमाणु कूटनीति की पूरी दिशा बदल सकती है.

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