Iran को रूस से मिला MiG-29 लड़ाकू विमानों का नया जत्था – मध्य पूर्व में बदल सकता है शक्ति संतुलन

MiG-29

रूस ने Iran को MiG-29 लड़ाकू विमानों की नई खेप सौंप दी है. यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है.

Iran सांसद अबोलीफज़ल ज़ोहरवन्द ने पुष्टि की है कि रूस से आए ये MiG-29 लड़ाकू विमान एक तरह का “अंतरिम समाधान” हैं, जब तक कि ईरान को बहुप्रतीक्षित Su-35 सुपीरियर एयरक्राफ्ट नहीं मिल जाते. बताया जा रहा है कि ये विमान शिराज़ एयरबेस पर तैनात कर दिए गए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही MiG-29 तकनीकी रूप से Su-35 जितना उन्नत न हो, लेकिन यह ईरान की मौजूदा वायुसेना की ताकत को तुरंत बढ़ा देगा. 1980 और 1990 के दशक के पुराने विमानों पर निर्भर ईरान के लिए यह कदम क्षेत्रीय संतुलन में अहम साबित हो सकता है.

इज़रायल और पश्चिमी देशों की चिंता

MiG-29

ईरान को नए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति से इज़रायल और पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है. इज़रायल पहले ही ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर सतर्क है. अब ईरानी वायुसेना के पास बेहतर लड़ाकू क्षमता आने से भविष्य में किसी भी संभावित टकराव की स्थिति बदल सकती है.

अभी भी अनिश्चितता बरकरार

हालांकि, रूस और ईरान – दोनों सरकारों की तरफ से इस सौदे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. न ही यह साफ है कि कुल कितने विमान डिलीवर किए गए हैं और उनका संस्करण कौन सा है – पुराना MiG-29A या अपग्रेडेड वर्ज़न.

रणनीतिक असर

ईरान को MiG-29 मिलने से उसकी हवाई रक्षा क्षमता तुरंत मजबूत होगी. भविष्य में Su-35 और संभवत: चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की संभावना से ईरान की वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी.

मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन पर इसका सीधा असर पड़ेगा, खासकर इज़रायल और खाड़ी देशों की रणनीतियों पर.

रूस से मिले MiG-29 लड़ाकू विमान ईरान की वायुसेना के लिए एक बड़ा कदम हैं. यह सौदा मध्य पूर्व की भू-राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है, हालांकि इसके प्रभाव की असली तस्वीर तब सामने आएगी जब ईरान को आधुनिक Su-35 जैसे उन्नत लड़ाकू विमान भी मिल जाएंगे.

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