FCAS प्रोजेक्ट से Germany का किनारा? Britain के Tempest और Sweden प्रोग्राम पर नज़र
यूरोप की सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना FCAS (Future Combat Air System) एक बार फिर विवादों के घेरे में है. France, Germany और Spain के बीच परियोजना के दूसरे चरण को लेकर बातचीत ठप हो गई है, और अब इस बात की चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं कि जर्मनी इस कार्यक्रम से बाहर निकल सकता है.
SCAF/FCAS प्रोजेक्ट को यूरोप का सबसे बड़ा रक्षा एयरोस्पेस कार्यक्रम माना जाता है, जिसका उद्देश्य 2040 तक अगली पीढ़ी के फाइटर जेट और उससे जुड़े कॉम्बैट सिस्टम विकसित करना है. लेकिन, फ्रांस और जर्मनी के बीच इंडस्ट्रियल शेयरिंग, तकनीकी ट्रांसफर और नेतृत्व की भूमिका को लेकर मतभेद लंबे समय से सामने आते रहे हैं.
क्यों बढ़ा विवाद?
विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस चाहता है कि Phase-2 में परियोजना के नेतृत्व और काम का बड़ा हिस्सा उसके पास रहे. वहीं, जर्मनी और स्पेन इस मांग को संतुलित साझेदारी के खिलाफ मानते हैं. काम की हिस्सेदारी (workshare) और तकनीकी नेतृत्व पर बनी यह खींचतान परियोजना को डेडलॉक की स्थिति में ले आई है.
जर्मनी के विकल्प
जर्मनी अब वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहा है:
ब्रिटिश Tempest प्रोग्राम (GCAP): ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा यह प्रोजेक्ट 6th-Gen फाइटर जेट बनाने का लक्ष्य रखता है.
स्वीडन के साथ सहयोग: जर्मनी और स्वीडन पहले ही रक्षा सहयोग पर सहमति जता चुके हैं. संभावना है कि दोनों देश अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान या एयर कॉम्बैट सिस्टम को संयुक्त रूप से विकसित करें.
यूरोप पर असर
अगर जर्मनी FCAS से बाहर निकलता है, तो यह यूरोप की सामूहिक रक्षा रणनीति पर बड़ा असर डालेगा. एक ओर फ्रांस-स्पेन के साथ गठबंधन कमजोर हो सकता है, वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन या स्वीडन के साथ नई साझेदारी जर्मनी को अधिक स्वतंत्रता और तकनीकी नियंत्रण प्रदान कर सकती है.
यूरोप की रक्षा परियोजनाओं के भविष्य को तय करने वाला यह क्षण अहम साबित हो सकता है. आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि जर्मनी FCAS में बना रहता है या किसी नए गठबंधन के साथ अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक की दिशा तय करता है.