चीन ने दिखाया समुद्र के भीतर चलने वाला खतरनाक ड्रोन–AJX002
चीन ने अपनी सैन्य ताक़त का नया नमूना दुनिया के सामने रखा है. हाल ही में आयोजित द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ परेड में चीन ने पहली बार AJX002 नामक पानी के भीतर चलने वाले विशाल मानवरहित ड्रोन (XLUUV) का प्रदर्शन किया. यह ड्रोन आकार और तकनीक दोनों के लिहाज से बेहद उन्नत माना जा रहा है.
आकार और बनावट
कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, AJX002 की लंबाई करीब 18 से 20 मीटर और व्यास लगभग 1 से 1.5 मीटर है. इसका डिज़ाइन एक बड़े टॉरपीडो जैसा है और इसमें आधुनिक पंप-जेट प्रपल्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसे समुद्र में उतारने के लिए क्रेन का प्रयोग किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉड्यूलर ढांचे में बनाया गया है, यानी इसे अलग-अलग हिस्सों में आसानी से ले जाया जा सकता है.
संभावित मिशन
हालांकि चीन ने इसकी क्षमताओं की आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कई मिशनों में काम आ सकता है –
- समुद्र की गहराई में जासूसी और निगरानी
- दुश्मन के रास्ते रोकने के लिए बारूदी सुरंग बिछाना (Mine Laying)
- अपने सेंसर के ज़रिए स्वायत्त नेविगेशन और दुश्मन–दोस्त जहाज़ों की पहचान
- कई ड्रोन मिलकर एक नेटवर्क के रूप में काम करना
रणनीतिक संदेश
विशेषज्ञ मानते हैं कि AJX002 चीन के लिए एक स्ट्रैटेजिक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. इसकी तुलना रूस के परमाणु-संचालित Poseidon टॉरपीडो से की जा रही है, लेकिन माना जा रहा है कि AJX002 परमाणु-संचालित नहीं है.
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह चीन की समुद्री शक्ति (Sea Power) बढ़ाने की रणनीति का अहम हिस्सा है. बताया जा रहा है कि चीन फिलहाल कम से कम पांच अलग-अलग मॉडल्स पर काम कर रहा है और आने वाले वर्षों में इन्हें बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सकता है.
भारत की तैयारी
भारत अभी चीन जैसी विशाल XLUUV तकनीक के स्तर पर नहीं पहुँचा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ चल रही हैं:
AUV (Autonomous Underwater Vehicle) कार्यक्रम – DRDO
डीआरडीओ लंबे समय से AUV-150 और AUV-500 पर काम कर रहा है. इनका इस्तेमाल निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्र तल के सर्वे के लिए किया जाता है.
नवीन अंडरवाटर ड्रोन – राष्ट्रीय समुद्री रक्षा परियोजना
भारतीय नौसेना ने कई प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर अंडरवाटर ड्रोन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं.
हाल ही में समुद्र में ट्रायल किए गए छोटे AUV सिस्टम्स से अच्छे परिणाम मिले हैं.
रणनीतिक सहयोग
भारत अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के साथ मिलकर अनमैन्ड अंडरवाटर प्लेटफॉर्म्स विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है.
अमेरिका का Orca XLUUV और फ्रांस का D19 ड्रोन भारत के लिए सहयोग के संभावित विकल्प माने जा रहे हैं.
तुलना: कौन आगे?
चीन: पहले से ही बड़े आकार के पानी के नीचे ड्रोन (XLUUV) बना चुका है, जिनका इस्तेमाल वह समुद्र में निगरानी और रणनीतिक प्रभुत्व के लिए कर सकता है.
भारत: छोटे और मध्यम आकार के AUV सिस्टम्स पर फोकस कर रहा है. अभी तक AJX002 जैसे बड़े सिस्टम के बराबर कोई प्रोजेक्ट सार्वजनिक नहीं हुआ है. हालांकि सहयोग और स्वदेशी विकास के जरिए आने वाले वर्षों में भारत इस अंतर को कम करने की दिशा में काम कर रहा है.
नतीजा
चीन का यह नया ड्रोन संकेत देता है कि आने वाले समय में समुद्री युद्ध का चेहरा बदलने वाला है. अब जंग केवल पनडुब्बियों और जहाज़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मानवरहित पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन इसमें अहम भूमिका निभाएँगे.
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