चीन ने बनाया विश्व का पहला जेट-पावर्ड VTOL ड्रोन
कल्पना कीजिए… समुद्र के बीचों-बीच लहरों से जूझता एक युद्धपोत है… और अचानक उसके डेक से आसमान की ओर उठता है एक रहस्यमयी ड्रोन. न कोई लंबा रनवे, न कोई एयरबेस… बस सीधे vertical उड़ान और फिर पलक झपकते ही जेट की रफ्तार से आसमान चीरता हुआ आगे निकल जाना!
जी हाँ – चीन ने दुनिया का पहला जेट इंजन चालित हाई-स्पीड VTOL ड्रोन पेश किया है, जो आने वाले नौसैनिक युद्ध का पूरा खेल बदल सकता है.
टेक्नोलॉजी का कमाल
इस ड्रोन को चीन के बेइहांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 10 साल की मेहनत के बाद बनाया है.
इसमें दोहरी प्रणाली है – नीचे लगे कॉम्पैक्ट रोटर वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग में हेलीकॉप्टर जैसा लिफ्ट देते हैं. और एक लघु टर्बोजेट इंजन इसे तेज़ क्रूज़ फ्लाइट की ताकत देता है.
लेकिन असली क्रांति है इसका रिट्रेक्टेबल फेयरिंग सिस्टम…
जैसे ही ड्रोन तेज़ गति पकड़ता है, रोटर बंद होकर एक वायुगतिकीय (Aerodynamics) कवर में छिप जाते हैं – जिससे हवा का प्रतिरोध 60% तक घट जाता है और ड्रोन का आकार एक शुद्ध जेट जैसा हो जाता है.
परफॉर्मेंस और टेस्टिंग
शुरुआती टेस्ट वर्ज़न का वज़न सिर्फ़ 45 किलो था, और इसने आसानी से 230 किमी/घंटा की स्पीड पकड़ ली.
इसका एयरफ्रेम हल्का और मजबूत है, ताकि युद्धपोत के हिलते-डुलते डेक पर भी आसानी से लैंड किया जा सके. इसमें थर्मल शील्डिंग है, जो 700°C तक तापमान झेल सकती है… और सबसे बड़ी बात – यह हर मौसम, हर परिस्थिति में उड़ान भर सकता है.
रणनीतिक असर
अब सोचिए, अगर चीन अपनी नेवी में इस तरह के ड्रोन तैनात कर देता है… तो क्या होगा…
हर विध्वंसक, हर फ्रिगेट, यहां तक कि छोटे उभयचर पोत भी मिनी एयरक्राफ्ट कैरियर में बदल जाएंगे
ये ड्रोन झुंड में उड़कर दुश्मन की एयर डिफेंस को भेद सकते हैं. लंबी दूरी की टोही, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और छोटे हथियारों से सटीक हमले कर सकते हैं. और सबसे बड़ी बात – इन्हें किसी निश्चित एयरबेस की ज़रूरत नहीं… ये सीधे जहाज़ पर लौट सकते हैं.
यानी… प्रशांत और हिंद महासागर में चीन की पहुँच और भी गहरी हो सकती है.
हालाँकि, इसमें कुछ कमियाँ भी हैं – हाई-स्पीड उड़ान में रोटर सिस्टम बेकार भार बन जाता है. पेलोड क्षमता सीमित है, यानी भारी हथियार नहीं ले जा सकता.
इसकी रेंज और लोड, ग्लोबल हॉक या XQ-58A वाल्किरी जैसे बड़े ड्रोन से कम होगी. इसलिए यह ज्यादा कारगर होगा रिकॉन, इलेक्ट्रॉनिक जामिंग और छोटे टार्गेट अटैक के लिए.
सस्पेंस और सवाल
चीन की यह खोज भविष्य के नौसैनिक युद्ध का नक्शा बदल सकती है.
सोचिए – जब दुश्मन को यह पता ही न चले कि हमला किस जहाज़ से, कब और कहाँ से होने वाला है – तब उसकी रणनीति ध्वस्त हो जाएगी.
सवाल ये है – क्या भारत और अमेरिका इस नई टेक्नोलॉजी का तोड़ ढूंढ पाएंगे? या फिर आने वाले समय में समुद्री जंग का मैदान मिनी-कैरियर्स और VTOL ड्रोन का साम्राज्य बन जाएगा?
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