PAKISTAN सरकार ने प्रतिनिधिमंडल के ISRAEL दौरे को नकारा, कहा- यह संभव नहीं

PAKISTAN सरकार ने उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तानी पत्रकारों और शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले सप्ताह इजरायल का दौरा किया है. पाकिस्तान सरकार का कहना है कि पाकिस्तानी पासपोर्ट इजरायल यात्रा के लिए बैध नहीं है. इसलिए मौजूदा विनियमन के तहत ऐसी कोई यात्रा संभव नहीं है.
पाकिस्तान इज़रायल के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखता है और कई मुस्लिम देशों में से एक है जो आधिकारिक तौर पर अपने नागरिकों को यहूदी राज्य में जाने से मना करते हैं. पाकिस्तानी नागरिकों के पासपोर्ट के अंदर लिखा होता है, “इज़रायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों में मान्य.”
पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देता है, ऐसे में पाकिस्तानी डेलिगेशन का इजरायल दौरा पाकिस्तान में सुर्खियों में आ गया. दरअसल, पिछले दिनों इजरायल की मीडिया ने एक ऐसी खबर पब्लिश की जिसके बाद पूरे पाकिस्तान में भूचाल आ गया. पाकिस्तान में लोगों ने पाक सरकार के खिलाफ आलोचना कर शुरु कर दिया. जिसके बाद आखिरकार पाक सरकार को बयान जारी करना पड़ा.
पाकिस्तानी पत्रकारों और शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल का इजरायल की यात्रा करना कूटनीतिक के दृष्टिकोण से बहुत बड़ी खबर है. हालांकि पाकिस्तान ने इसका खंडन किया है लेकिन कूटनीति में इस तरह का खंडन सिर्फ दिखावा ही होता है. जिसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं होता है. इसलिए इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता है.
कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल शारका संगठन के निमंत्रण पर इज़रायल का दौरा किया था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच पुल बनाना था.
शारका एक गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 2020 में अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद इज़रायल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के नागरिकों द्वारा की गई थी.
यह तीनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने, शांति, विश्वास और सहयोग को मज़बूत करने के लिए मौजूद है. यह संगठन मध्य पूर्व में संबंधों को बेहतर बनाने के लिए “लोगों से लोगों की कूटनीति” पर ध्यान केंद्रित करता है.

जहां एक तरफ पाकिस्तान इस बात से इंकार कर रहा है, वहीं इजरायली मीडिया में समूह में शामिल कुछ लोगों का साक्षात्कार भी पब्लिश हुआ है. समूह में शामिल पाकिस्तानी पत्रकार और फिल्म निर्देशक सबिन आगा ने अपनी यात्रा के दौरान तेल अवीव में एक साक्षात्कार में जेएनएस को बताया, “मैं हमेशा अपने मन में उठने वाले सभी सवालों का पता लगाने और अपने देश और मुस्लिम दुनिया द्वारा यहूदियों के बारे में बताई गई बातों के बारे में सभी भ्रम को दूर करने के लिए इजरायल आना चाहती थी.” “मुझे मुस्लिम देशों के राज्य कथन के बिल्कुल विपरीत पाकर आश्चर्य नहीं हुआ.”
इस्लामाबाद टेलीग्राफ के प्रधान संपादक कसवर क्लासरा ने कहा, “इज़राइल में आना एक सुखद आश्चर्य था क्योंकि हमारे आने से पहले हमें केवल एकतरफा जानकारी मिल रही थी,” उन्होंने बेन-गुरियन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही आव्रजन अधिकारियों से लेकर हवाई अड्डे के सफाईकर्मियों और फिर उनकी पूरी यात्रा के दौरान समूह को मिले गर्मजोशी भरे स्वागत को नोट किया. ये भी सच है कि प्रतिनिधिमंडल के अधिकांश सदस्य सुरक्षा चिंताओं और घर लौटने पर नतीजों के डर के कारण साक्षात्कार या फोटो खिंचवाना नहीं चाहते थे.
यह विडंबना है कि पाकिस्तान और इजराइल दोनों ही देश धर्म के नाम पर लगभग एक ही समय (क्रमशः 1947 और 1948 में) बनाए गए थे, और फिर भी उनके बीच कोई औपचारिक संबंध नहीं हैं. इजराइल के प्रति पाकिस्तान की दुश्मनी फिलिस्तीनियों के विस्थापन में निहित है, इसने मुस्लिम देशों के समुदाय के भीतर देश की साख को चमकाने और भारत के खिलाफ़ दबाव बनाने के साधन के रूप में भी काम किया है, जो इजराइल के साथ लगातार घनिष्ठ संबंध बनाए रखता है.
अपनी स्थापना के तुरंत बाद, पाकिस्तान ने फिलिस्तीन में यहूदी राज्य बनाने के विचार का विरोध किया और फिलिस्तीन पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष समिति के माध्यम से फिलिस्तीन के विभाजन की योजना के खिलाफ मतदान किया. पाकिस्तान ने इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान अरब देशों का पक्ष लिया. इराक और यूनाइटेड किंगडम के अलावा पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश था, जिसने 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान वेस्ट बैंक पर जॉर्डन के कब्जे को मान्यता दी थी. 1967 में अरब-इजरायल युद्ध में एक पाकिस्तानी पायलट ने सीरियाई लड़ाकू जेट का उपयोग करके एक इजरायली विमान को मार गिराया था.
हालांकि, पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों का कट्टर समर्थक नहीं रहा है, खासकर तब जब उनके मुद्दे किसी अन्य अरब राष्ट्र के राष्ट्रीय हितों के साथ टकराते थे.