भारत खरीदेगा दुनिया की सबसे बेहतरीन रडार सिस्टम में से एक वोरोनेझ’! क्या हैं इसकी खासियत
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस 8000 किलोमीटर रेंज वाली एक अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम खरीदने संबंधी एक सौदे को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं. इस रडार को एस-400 बनाने वाली अल्माज-एंटे कॉरपोरेशन कंपनी ने बनाया है. इस कंपनी को रडार एवं एंटी एयरक्रॉफ्ट मिसाइल सिस्टम बनाने में महारत हासिल है. इस रडार का नाम ‘वोरोनेझ’ है. वोरोनेझ रडार की कीमत 4 बिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है.
आज हम जानेंगे क्यों वोरोनेझ को कहा जाता है दुनिया की सबसे ताकतवर रडार
‘वोरोनेझ’ दुनिया के सबसे बेहतरीन रडार सिस्टम में से एक है. इसकी एक्यूरेसी यानी सटीकता और निगरानी क्षमता गजब की है. वोरोनेझ रडार बैलिस्टिक मिसाइलों, विमानों और लंबी दूरी पर अन्य हवाई खतरों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्रारंभिक चेतावनी रडार सिस्टम है. यह सिस्टम रूस के मिसाइल रक्षा और अंतरिक्ष निगरानी बुनियादी ढांचे का हिस्सा है. रूस ने 2012 में इस सिस्टम का उपयोग करना शुरू किया था. उसने अपने व्यापक प्रारंभिक चेतावनी और मिसाइल रक्षा बुनियादी ढांचे के हिस्से के रूप में कम से कम दस वोरोनेझ रडार सिस्टम तैनात किए हैं.
8,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर ही डिटेक्ट कर लेगा
इस रडार की सबसे बड़ी खूबी है कि यह किसी भी तरह के एरियल यानी हवाई खतरे को यह बहुत दूर से भांप लेगा. दुश्मनों के फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को यह रडार सिस्टम 8,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर ही डिटेक्ट कर लेगा यानी भारत में इसके लगने के बाद पूरा चीन, दक्षिण एवं मध्य एशिया और हिंद महासागर का ज्यादातर हिस्सा इसकी निगरानी में आ जाएगा.
वोरोनेझ रडार की रेंज लगभग 6,000 से 8,000 किमी (लगभग 3,700 से 5,000 मील) है. अभी तक केवल रूस, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के पास ही 5,000 किमी से अधिक की संचालन सीमा वाले रडार सिस्टम हैं.
भारत ने रूस के साथ वोरोनेझ रडार सिस्टम को खरीदने के लिए रूस के साथ बातचीत को अंतिम रूप दे दिया है. भारत के वायु रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 4 अरब डॉलर के रक्षा सौदे पर रूस के साथ सहमति हो गई है. वोरोनेझ रडार प्रणाली से बड़े इलाके में हवाई खतरों का पता लगाने और उनका जवाब देने की भारत की क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी.
रूस के मुताबिक यह सिस्टम एक साथ 500 से अधिक उड़ने वाली चीजों की निगरानी कर सकता है और अंतरिक्ष में पृथ्वी के निकट की वस्तुओं को भी ट्रैक कर सकता है. यह क्षमता क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की उभरती सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगी.
‘मेक इन इंडिया’ के तहत निर्माण को बढ़ावा
भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप इस सौदे में कम से कम 60 फीसदी रडार सिस्टम को घरेलू स्तर पर बनाने का प्रावधान शामिल है. इससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी..
ऐसे समय जब चारों तरफ युद्ध का माहौल हैं ऐसे में दुनिया की सबसे ताकतवर रडार का भारतीय सेना के पास होना जरूरी हो जाता है.
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